राहुल गांधी के 4 दिन के कार्यक्रम के 14 लाख तो पटाखा बाजार से 40 दिन का 5 लाख क्यों? IDA के रेट कार्ड पर मचा बवाल
इंदौर के रीजनल पार्क मैदान में पटाखा बाजार के लिए किराया तय नहीं हुआ, जबकि दुकानें बन रही हैं। व्यापारियों से एक-एक लाख रुपये जमा कराने पर सवाल उठे।
Publish Date: Sun, 04 Oct 2026 08:57:19 AM (IST)Updated Date: Sun, 04 Oct 2026 09:31:47 AM (IST)
IDA पर उठे सवाल। (फाइल फोटो)HighLights
- रीजनल पार्क मैदान में 41 अस्थाई पटाखा दुकानें बनाई जा रही।
- आईडीए ने अभी तक किराए का अंतिम आंकड़ा तय नहीं किया।
- पटाखा व्यापारियों से एक-एक लाख रुपये जमा कराए जा रहे।
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: चार दिन के लिए जो मैदान 14 लाख रुपये में दिया था उसी मैदान को 40 दिन के लिए 5 लाख रुपये में दिया जा सकता है। राहुल गांधी के आयोजन छात्रों की गूंज के बाद अब यह सवाल खड़ा हो गया है। पिपल्याराव में रीजनल पार्क के सामने स्थित मैदान में थोक पटाखा मार्केट बनना शुरू हो गया है।
दुकानें बनने तक भी आइडीए ने ना तो किराया जमा करवाया है ना ही अभी तय किया है। शनिवार को व्यापारियों की बैठक हुई जिसमें दावा किया जा रहा है कि बीते साल पांच लाख रुपये से कम आइडीए ने किराए के रूप में जमा करवाए थे और इस साल सात लाख रुपये किराया देना पड़ सकता है। शनिवार को व्यापारियों का प्रतिनिधिमंडल आइडीए के अधिकारियों से मिलकर भी लौटा।
व्यापारियों से मांगे एक-एक लाख रुपये
- रीजनल पार्क के सामने स्थित मैदान पर 41 अस्थाई थोक दुकानें बनाई जा रही है। इसके साथ जेनरेटर रूम, लाइट के टावर और मैदान के शेष हिस्से को पार्किंग के रूप में इस्तेमाल किया जाना है।चार दिन के लिए 14 लाख रुपये किराया और जीएसटी कांग्रेस से वसूलने के बाद आइडीए फिलहाल पटाखा मार्केट के शुल्क का खुलासा नहीं कर रहा है।
- अब तक पटाखा व्यापारी एसोसिएशन को आइडीए ने डिमांड नोट भी नहीं दिया है। इस बीच पटाखा व्यापारी एसोसिएशन ने दुकान लगाने वाले व्यापारियों से फिलहाल एक-एक लाख रुपये एकत्र करने के लिए कहा है। इसमें मैदान के किराए से लेकर दुकान बनाने का खर्च, बिजली के खर्च से लेकर सुरक्षा खर्च और अधिकारियों का खर्चा भी शामिल है।
अब बीते साल की रिकवरी
- सूत्रों के अनुसार आइडीए हर साल पटाखा दुकानों के लिए बमुश्किल 5 लाख रुपये ही शुल्क लेता रहा है। राहुल गांधी के आयोजन के लिए नेहरू स्टेडियम नहीं देने के बाद कांग्रेस ने इस मैदान को आयोजन के लिए चुना। पहले करीब दस लाख रुपये और बाद में फिर 4 लाख रुपये आइडीए ने और जमा करवाए। इसे मैदान का किराया और जीएसटी बताया गया।
- सूत्रों के अनुसार अब आइडीए के अधिकारी बीते साल वसूले गए कम शुल्क पर भी घेरे में है। व्यापारियों से कहा गया है कि हल्ला मचा तो बीते साल जो किराया कम दिया था उसकी भरपाई भी इस साल करना पड़ सकती है। व्यापारियों ने कह दिया कि आइडीए ने बीते साल जो पैसा बताया था हमनें भर दिया ऐसे में अब किराया बढ़ाकर कैसे शेष पैसा मांगा जा सकता है।
- सूत्रों के अनुसार अधिकारियों ने बीच का रास्ता निकालने का आश्वासन दिया है। इसी कशमकश के बीच अब किराए का अंतिम आंकड़ा तय नहीं हो पाया है। ना ही डिमांड नोट जारी किया है और दुकानें बनने का काम शुरू हो गया है। इस बीच पटाखा व्यापारी एसोसिएशन से नाराज कई व्यापारियों ने सवाल भी उठा दिया है। व्यापारी शिकायत कर रहे हैं कि बीते साल अधिकारियों को पटाखे और गिफ्ट के लिए ही करीब 20 लाख का खर्च दिखाया गया। पूरे हिसाब को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा।
आठ दिन में डिलीट कर देता हूं हिसाब
- इस पूरे विवाद के बाद इंदौर होलसेल फायर वर्क्स एसोसिएशन के अध्यक्ष शंकर होतचंदानी ने कहा कि इस साल किराया अब तक जमा नहीं हुआ है। क्योंकि आइडीए सीइओ बाहर थे उनके आने के बाद हमें राशि बताई जाएगी। देरी हो रही थी इसलिए दुकान बनाना शुरू कर दी गई।
हमने प्रत्येक व्यापारी से एक लाख रुपये लिए हैं। वह भी कई व्यापारियों ने नहीं दिए हैं। हर साल दुकानें हटने के बाद मैं वाट्सएप ग्रुप पर हिसाब की पर्ची डालता हूं और आठ दिन बाद उसे डिलीट कर देता हूं। बीते साल का हिसाब अब हमारे पास नहीं हैं। शुल्क लेकर ही देते हैं मैदान
हर साल शुल्क लेने के बाद ही मैदान पटाखा की दुकानों के लिए दिया जाता है। इस साल भी शुल्क लिया जा रहा है। आंकड़ा अभी याद नहीं है।
परीक्षित झाड़े, सीईओ आइडीए
रिकॉर्ड सामने रखने होंगे
कांग्रेस ने सामाजिक और गैर व्यवसायिक आयोजन के लिए 14 लाख रुपये ज्यादा किराया 3-4 दिनों के लिए चुकाया। व्यवसायिक गतिविधि के लिए जाहिर सी बात है कि दर कम नहीं हो सकती। बीते साल और इस साल के भी आंकड़ें सार्वजनिक करना होंगे। इसी से साफ होगा कि कहीं कोई अधिकारी तो भ्रष्टाचार कर शासन को राजस्व का चूना नहीं लगा रहा।
चिंटू चौकसे, शहर कांग्रेस अध्यक्ष
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