
Ram Mandir Pran Pratistha: नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। सैकड़ों वर्षों के इंतजार के बाद अयोध्या में जब भगवा ध्वज लहराने लगा तो उसकी रंगत पूरे आर्यवृत में नजर आने लगी। हर सनातनी का मन राममय होने लगा और हर भारतीय के घर में उस उत्साह के चौक पुराने लगे, जिसमें अपने के आगमन का भाव निहित रहता है। 14 वर्ष के वनवास के बाद रघुकुल भूषण जब अयोध्या लौटे होंगे तब अवधपुरी के जनमानस के मन में कितना उत्साह-उमंग होगा, इसका अंदाजा तो नहीं लगाया जा सकता, लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि अब जब रामलला मंदिर में विराजित हो रहे हैं तो जो खुशी हर भारतीय के मन में है, हर सनातनी के हृदय में है उसका भी पार नहीं पाया जा सकता।
नईदुनिया के रामोत्सव सबके राम कार्यक्रम में उपस्थित अतिथिगण।
जिस राम के नाम पर समूचा भारत एक बार फिर ‘अखंड भारत’ की उपाधि से अलंकृत हो गया, उस आराध्य की भक्ति नईदुनिया ने ‘श्रीरामोत्सव ‘सबके’ राम’ नाम से आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से की। शुक्रवार को ‘श्रीरामोत्सव सबके राम’ गोविंदराम सेक्सरिया इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च के सभागृह में हुआ।
श्री श्रीविद्या धाम के वेदपाठी बटुकों के स्वस्तिवाचन से प्रारंभ हुआ रामोत्सव।
इस सारस्वत आयोजन का आरंभ शंखनाद से हुआ और उसके बाद 11 बटुकों के स्वस्ति वाचन ने उसे और भी पुनीत बना दिया। मंच के एक ओर सजा श्रीराम दरबार तो दूसरी ओर जन-जन के राम की चर्चा। इसमें वेदो, पुराण और ग्रंथों की चर्चा भी थी तो चित्रकारी, कथक, गायन और काव्य के रंग भी निहित थे।
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— NaiDunia (@Nai_Dunia) January 12, 2024
संबोधित करते हुए भारतीय संस्कृति के अध्येता व वेदों के विद्वान डा. मुरलीधर चांदनीवाला ने कहा कि श्रीराम का अपना कोई नीति शास्त्र नहीं था, क्योंकि उनका चरित्र अपने आप में नीति है। श्रीराम ने संसार को उपदेश नहीं, चरित्र दिया है। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि श्रीराम को किसी की मान्यता की आवश्यकता नहीं। वे जन-जन के मन में बसे हैं। प्रजातंत्र में कई बार देर से निर्णय होते हैं और उसके कई कारण होते हैं। आज राम मंदिर इतिहास लिख रहा है, जो भारत के जनतंत्र को मजबूत करेगा।

नृत्य नाटिका की प्रस्तुति देती कत्थक गुरु रागिनी मक्खर व साधिकाएं
आइएमएस के पूर्व निदेशक डा. पीएन मिश्रा ने कहा कि भगवान राम का यह मंदिर भारत के शौर्य का प्रतीक है। मंदिर कहीं और भी बन सकता था, लेकिन जिस स्थान पर मंदिर बन रहा है वह सनातनियों की आस्था और शौर्य को दर्शाता है। साहित्यिक पत्रिका वीणा के संपादक राकेश शर्मा ने कहा कि एक वक्त आया था जब सत्ता के समर्थन की वजह से साहित्य से भी सबके राम को एक तरफ करने का प्रयास किया गया। राम राज को बचाने के लिए अपनी बोली को बचाने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम को संबोधित करतीं लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष सुमित्रा महाजन। पास बैठे हैं अन्य अतिथि।
संस्कृत के विद्वान आचार्य पिंगलेश कचौले ने कहा कि रामजी का चरित्र 200 देशों में गाया जा रहा है। यदि उसमें सत्यता नहीं होती तो दूसरे देश हमारे राम से प्रेरित क्यों होते। कैबिनेट मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की कुलपति डा. रेणु जैन के आतिथ्य में यह कार्यक्रम हुआ।
कार्यक्रम के समापन के पूर्व महाआरती करते गेंदेश्वर महादेव मंदिर के मुख्य पुजारी पं. विश्वजीत शर्मा।
इस अवसर पर नईदुनिया को सहयोगी प्रकाशन दैनिक जागरण के एसोसिएट एडिटर अनंत विजय, नईदुनिया के राज्य संपादक सद्गुरु शरण अवस्थी और स्ट्रेटेजी एंड ब्रांड डेवलपमेंट जागरण प्रकाशन लि. के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट विनोद श्रीवास्तव भी उपस्थित थे। मंत्रोच्चार से आरंभ हुए आयोजन का समापन महाआरती से हुआ।