दीवाली से पहले आया खरीदी का महामुहूर्त रवि-पुष्य नक्षत्र, इंदौर में ग्राहकों के लिए बाजार तैयार, जानें मुहूर्त
दीपावली के सात दिन पहले एक नवंबर को खरीदी का महामुहूर्त पुष्य नक्षत्र 22 घंटे रहेगा। ज्योतिर्विदों के अनुसार दीपावली के पहले आने वाले पुष्य नक्षत्र का विशेष महत्व होता है लेकिन जब यह गुरुवार और रविवार को आता है तो इसका महत्व कई गुना मिलता है।
Publish Date: Sun, 01 Nov 2026 08:57:18 AM (IST)Updated Date: Sun, 01 Nov 2026 08:57:18 AM (IST)
इंदौर के राजवाड़ा पर खरीदी करने उमड़ी भीड़। -नईदुनियाHighLights
- कार्य में नक्षत्रों का राजा देगा पोषण, वृद्धि, स्थायित्व और समृद्धि
- शुभ संयोग में भूमि-भवन, सोना-चांदी की खरीदारी लाभदायक
- वाहन सहित सभी चल-अचल संपत्ति की खरीदारी भी लाभदायक
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : दीपावली के सात दिन पहले एक नवंबर को खरीदी का महामुहूर्त पुष्य नक्षत्र 22 घंटे रहेगा। ज्योतिर्विदों के अनुसार दीपावली के पहले आने वाले पुष्य नक्षत्र का विशेष महत्व होता है लेकिन जब यह गुरुवार और रविवार को आता है तो इसका महत्व कई गुना मिलता है।
इस दिन सर्वार्थसिद्धि, लक्ष्मीनारायण, श्रीवत्स, मालव्य एवं राजयोग एवं अहोई अष्टमी भी है। इस दिन रविवार होने से रवि-पुष्य का संयोग भी बन रहा है। ऐसे में यह दिन भूमि-भवन, सोना-चांदी, वाहन सहित सभी चल-अचल खरीदारी के लिए शुभ फल प्रदान करने वाला है।
ज्योतिर्विद् आचार्य शिवप्रसाद तिवारी ने बताया कि पुष्य नक्षत्र 1 नवंबर को सुबह 6.31 बजे से प्रारंभ होकर 2 नवंबर सुबह 4.30 बजे तक रहेगा। इस तरह लगभग इक्कीस घंटे 59 मिनिट रहेगा। इसकी सबसे बड़ी विशेषता ''''वृद्धि के साथ स्थिरता'''' का भाव है। इसलिए परंपरागत रूप से इस दिन ऐसे कार्यों को शुभ माना जाता है, जिनमें लंबे समय तक लाभ और स्थायित्व की अपेक्षा हो। ज्योतिष में नक्षत्रों के राजा को पोषण, वृद्धि, स्थायित्व और समृद्धि का प्रतीक माना गया है।
इसलिए माना जाता पुष्य नक्षत्र को शुभ
- पुष्य को 27 नक्षत्रों का राजा माना जाता है, जो एक महत्वपूर्ण और शुभ नक्षत्र माना गया है।
- देवता बृहस्पति: पुष्य नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता बृहस्पति माने जाते हैं, जो ज्ञान, धर्म, समृद्धि और सद्बुद्धि के प्रतीक हैं।
- पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि है। शनि को अनुशासन, कर्म, स्थिरता और परिश्रम का कारक माना जाता है।
- पुष्य शब्द का संबंध पोषण और विकास से जोड़ा जाता है। इसलिए इसे शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल माना जाता है।
चौघड़ियानुसार खरीदी के लिए मुहूर्त
- चर : सुबह 07:56 से 09:21 एवं रात 8.59 से 10.35 बजे तक।
- लाभ: सुबह 09.21 से 10.45 बजे तक।
- अमृत : सुबह 10:45 से दोपहर 12:10 एवं शाम 7.24 से 8.59 बजे तक।
- शुभ : दोपहर 1.35 से दोपहर 2.59 एवं शाम 5.49 से 7.24 बजे तक।
स्थिर लग्ननुसार खरीदारी
- वृश्चिक : सुबह 7.49 से सुबह 10.08 बजे तक।
- कुंभ : दोपहर 1.54 से दोपहर 3.22 बजे तक।
- वृषभ : शाम 6.22 से शाम 8.17 बजे तक।
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