
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी समानता विनियम सर्कुलर पर टिप्पणी करते हुए इसे असंतुलित बताया। कहा कि न्यायालय ने भी इस पर रोक लगाई है और सरकार भी इस मामले को देख रही है। इस मुद्दे पर आगे जो भी निर्णय हो, वह संतुलित होना चाहिए और सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि समाज इतना कमजोर नहीं है कि किसी एक सर्कुलर से हिल जाए। समाज को एकजुट रहना चाहिए।
इंदौर में सोमवार (दो नवंबर) को शुरू होने जा रही संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक ले सम्मिलित होने पहुंचे आंबेकर ने शनिवार को पत्रकार वार्ता में यूजीसी के बहुचर्चित सर्कुलर को लेकर सवाल के जवाब में प्रतिक्रिया दी। जेन जी के आंदोलनों से जुड़े सवाल पर आंबेकर ने कहा कि देश में कोई आवाज उठाता है तो संघ को पक्ष-विपक्ष के नजरिये से क्यों देखा जाता है। सभी को ध्यान रखना चाहिए कि आंदोलन देशहित में हो। इस मामले में सतर्कता जरूरी है। संघ इसका ध्यान रखता है और आगे भी रखेगा।
इंदौर के डेली कॉलेज में होने जा रही अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में सम्मिलित होने के लिए देशभर से संघ के 408 प्रमुख पदाधिकारी पहुंचे हैं। सरसंघचालक डा. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सह कार्यवाह अतुल लिमये सहित सभी छह सह सरकार्यवाह इंदौर पहुंच गए हैं। आंबेकर ने बताया कि बैठक में शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा, संगठन विस्तार और सामाजिक विषयों पर चर्चा होगी। भविष्य के अभियानों और कार्ययोजना पर भी मंथन होगा। संगठन के नए ढांचे की अंतिम रूपरेखा इस बैठक के बाद तय होगी। बैठक में डा. मोहन भागवत के अगस्त-सितंबर में हुए अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के प्रवास पर भी चर्चा होगी।
यूजीसी ने जनवरी में सर्कुलर जारी करके उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम-2026 लागू किया और इसके अंतर्गत जातिगत भेदभाव रोकने के लिए 'इक्विटी कमेटी' (समता समिति) के गठन को अनिवार्य किया। इस विनियम के अंतर्गत समता समिति में ओबीसी, एससी और एसटी वर्गों के प्रतिनिधियों के साथ दिव्यांगजन और महिलाओं को भी शामिल करने का प्रविधान किया गया। इस पर सामान्य वर्ग के संगठनों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि नियमों में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के संरक्षण और झूठी शिकायत करने वालों पर कार्रवाई के स्पष्ट प्रविधान नहीं हैं। ऐसे में, इन नियमों का दुरुपयोग हो सकता है।