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'प्रोबेशन पीरियड में 70, 80 और 90% वेतन देने का नियम गलत, मिलेगी पूरी न्यूनतम सैलरी', एमपी हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

प्रोबेशन पीरियड में कर्मचारी को प्रथम वर्ष में 70, दूसरे में 80 और तीसरे वर्ष में 90% वेतन देने की व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका में एमजीएम मेडि...और पढ़ें

By Kuldeep BhawsarEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Tue, 20 Oct 2026 07:00:42 PM (IST)Updated Date: Tue, 20 Oct 2026 07:00:42 PM (IST)
'प्रोबेशन पीरियड में 70, 80 और 90% वेतन देने का नियम गलत, मिलेगी पूरी न्यूनतम सैलरी', एमपी हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
इंदौर हाई कोर्ट से नर्सिंग स्टाफ को बड़ी राहत।

HighLights

  1. इंदौर हाई कोर्ट से नर्सिंग स्टाफ को बड़ी राहत
  2. कर्मचारियों को मिले न्यूनतम सैलरी का लाभ
  3. हाई कोर्ट ने शासन को दिए भुगतान के निर्देश

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। परिवीक्षा अवधि में कर्मचारी को प्रथम वर्ष में 70, दूसरे में 80 और तीसरे वर्ष में 90 प्रतिशत वेतन देने की व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका में एमजीएम मेडिकल कालेज के नर्सिंग स्टाफ को राहत मिल गई है। हाई कोर्ट ने शासन को निर्देश दिए हैं कि नर्सिंग स्टाफ को परिवीक्षा अवधि के दौरान लागू वेतनमान का न्यूनतम वेतन दिया जाए।

नर्सिंग कर्मचारियों ने यह याचिका की थी प्रस्तुत

एमजीएम मेडिकल कालेज में पदस्थ कुछ नर्सिंग कर्मचारियों ने यह याचिका प्रस्तुत की थी। इसमें याचिकाकर्ताओं ने नियुक्ति आदेश में शामिल उस शर्त को निरस्त करने की मांग की थी, जिसके तहत परिवीक्षा अवधि के पहले तीन वर्ष में 70, 80 और 90 प्रतिशत न्यूनतम वेतन दिया जा रहा था। उन्होंने नियुक्ति दिनांक से पूरी परिवीक्षा अवधि के लिए वेतनमान का न्यूनतम वेतन, रोके गए वेतन की बकाया राशि और इस राशि पर ब्याज सहित अन्य लाभ दिलाए जाने की मांग की थी।


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न्यूनतम वेतनमान के अनुसार वेतन दें- कोर्ट

तर्क रखे कि इसी तरह के एक अन्य मामले में हाई कोर्ट पहले ही इस तरह के मामले में फैसला सुना चुका है। उस फैसले में परिवीक्षा अवधि के दौरान 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन देने के स्थान पर वेतनमान का न्यूनतम वेतन देने के लिए कहा गया है। शासन की ओर से याचिका निरस्त करने की मांग करते हुए क्षेत्राधिकार पर सवाल उठाया गया।

कोर्ट ने आदेश में लिखा है कि पूर्व में ही कोर्ट प्रतिशत में वेतन देने को गलत ठहरा चुकी है। ऐसे में शासन याचिकाकर्ताओं को परिवीक्षा अवधि के दौरान न्यूनतम वेतनमान के अनुसार वेतन दे।