
प्रणय चौहान, नईदुनिया, इंदौर : पितरों के तर्पण और पिंडदान के लिए गयाजी जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ इंदौर से रेल सुविधा की कमी एक बार फिर सामने आ गई है। इंदौर से गयाजी (बिहार) के लिए सीधे जाने वाली इंदौर-हावड़ा शिप्रा एक्सप्रेस ही एक मात्र ट्रेन है।
यह ट्रेन भी सप्ताह में केवल तीन दिन मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को चलती है। पितृपक्ष के दौरान गयाजी जाने वाले यात्रियों के लिए सीट मिलना मुश्किल हो रहा है। स्थिति यह है कि स्लीपर में ज्यादातर दिन 100 से ज्यादा वेटिंग है। वापसी में तो स्थिति रिग्रेट की बन चुकी है, यानी इतनी ज्यादा बुकिंग हो गई कि वेटिंग के टिकट बनना भी बंद हो गए।
गयाजी जाने वाले यात्रियों की मानें तो ट्रेन में करीब दो महीने पहले आरक्षण शुरू हुआ था, उसके कुछ घंटों में ही सभी सीटें फुल हो गई थीं। विडंबना यह है कि अब जिन यात्रियों को टिकट कंफर्म नहीं हुए है वे भोपाल, खंडवा, इटारसी या अन्य शहरों से होते हुए जाने को मजबूर हैं।
इंदौर से गयाजी की सीधी रेल दूरी करीब 1,277 किमी है और क्षिप्रा एक्सप्रेस से गयाजी पहुंचने में लगभग 23 घंटे 40 मिनट लगते हैं। ट्रेन इंदौर से रात 11:30 बजे रवाना होकर अगले दिन रात करीब 11:10 बजे गयाजी पहुंचती है। ऐसे में त्योहारी सीजन में एक बार फिर से स्पेशल ट्रेन चलाने की मांग भी उठी है। वहीं, सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि रेलवे के चेयरमैन सतीश कुमार से इंदौर-क्षिप्रा के साथ सभी स्पेशल ट्रेनों को नियमित करने की मांग की है।
इस बार 26 सितंबर को पूर्णिमा से श्राद्ध कर्म का दौर शुरू होगा और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या तक चलेगा। गयाजी में पिंडदान और तर्पण के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इंदौर से उपलब्ध एकमात्र सीधी ट्रेन सप्ताह में तीन दिन होने से यात्रियों के पास विकल्प सीमित हैं। विशेष रूप से उन लोगों के लिए परेशानी ज्यादा है, जिन्हें अपने पूर्वज की तिथि के अनुसार निर्धारित दिन ही गयाजी पहुंचना है। किसी दूसरी तारीख की ट्रेन पकड़ना उनके लिए व्यावहारिक विकल्प नहीं होता।
2018 में तत्कालीन रेलमंत्री पीयूष गोयल जब भोपाल आए थे, तब उन्होंने मंच से इंदौर-हावड़ा एक्सप्रेस को नियमित करने की घोषणा की थी, लेकिन आठ साल बाद भी ट्रेन सप्ताह में तीन दिन ही चल रही है। रेलवे एक्सपर्ट के अनुसार ट्रेन में सालभर दबाव रहता है। कई बार 120-130 प्रतिशत से ज्यादा यात्रियों का दबाव रहता है।
आज तक हजारों यात्रियों को ट्रेन के नियमित होने का इंतजार जारी है। यात्रियों का तर्क है कि सप्ताह में तीन दिन चलने वाली ट्रेन पितृपक्ष जैसे अवसरों पर मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त नहीं है। सामान्य दिनों में भी बिहार और झारखंड की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए इंदौर से सीधी रेल सुविधा सीमित है। मांग यह है कि क्षिप्रा एक्सप्रेस को सप्ताह के सातों दिन चलाया जाए या कम से कम पितृपक्ष में अतिरिक्त फेरे अथवा विशेष ट्रेन संचालित की जाए।
इस बार पितृपक्ष का कैलेंडर भी यात्रियों की योजना को प्रभावित कर सकता है। गयाजी के लिए उपलब्ध पंचांग के अनुसार 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध और 27 सितंबर से प्रतिपदा शुरू होती है। 30 सितंबर को चतुर्थी और पंचमी दोनों श्राद्ध पड़ रहे हैं, जबकि 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या होगी।