
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : तीन माह के इंतजार के बाद कानपुर चिड़ियाघर का दरियाई घोड़ा (हिप्पोपोटेमस) सतीश बुधवार रात इंदौर आया। 700 किलोमीटर लंबी यात्रा कर आए सतीश को विशेषज्ञ के दल की निगरानी में लाया गया।
इस दौरान उसके शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए लगातार नहलाया भी गया। इसके लिए विशेष इंतजाम भी किए गए थे। उसके उसके लिए चिड़ियाघर प्रशासन ने विशेष पिंजरा भी बनाया है जो उसकी लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई के हिसाब से है। इसमें उठने-बैठने में उसे किसी तरह की दिक्कत न हो इस बात का ध्यान रखा गया है।
चिड़ियाघर प्रभारी डॉ. उत्तम यादव ने बताया कि सतीश को एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत लाया गया है। इसके बदले में शेरनी बिजली दी गई है। गुरुवार सुबह डॉक्टरों की टीम द्वारा उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद उसे बाड़े में छोड़ा जाएगा।
उसकी उम्र आठ वर्ष है। उसको इंदौर लाने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी थी। एक माह से उसके लिए पिंजरा रखा गया था लेकिन वह उसमें प्रवेश नहीं कर रहा था। वह कानपुर के कमला नेहरू जूलॉजिकल पार्क में जन्मा है। अब वह इंदौर के चिड़ियाघर में दर्शकों का मनोरंजन करेगा।
वहीं यहां से शेरनी बिजली को कानपुर भेजा गया है, जिसके बदले में दरियाई घोड़ा सतीश इंदौर आया है। स्वास्थ्य जांच के बाद सतीश को बाड़े में छोड़ा जाएगा। कुछ दिनों तक उसके व्यवहार पर नजर रखी जाएगी। यह देखा जाएगा कि कानपुर से इतनी लंबी यात्रा करके आने के बाद उसके व्यवहार में कुछ बदलाव तो नहीं आया है। यहां के नए वातावरण में सामंजस्य बैठाने में उसे कुछ दिन लग सकते हैं। इस दौरान पर उस पर बारीक नजर रखी जाएगी।
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