नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : मध्यप्रदेश में अब फाइलें नहीं, फैसले होते हैं। अब मिनटों में समस्याएं सुलझ रही है। प्रदेश सरकार ने संभावनाओं को परियोजनाओं में बदला और समस्याओं का समाधान किया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में आयोजित सेमीकंडक्टर समिट में सरकार की कार्यशैली में आए बदलाव को रेखांकित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि पारदर्शी और सरल नीतियों के कारण मध्यप्रदेश निवेश के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है।
समिट के पहले दिन 14 कंपनियों ने 5800 करोड़ के निवेश प्रस्ताव दिए। वही पांच कंपनियों और सरकार के बीच एमओयू हुए। समिट में एक हजार से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान एवं स्वीडन के प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हुए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने ढाई साल में 25 से अधिक नीतियां बनाकर उद्योगों और निवेशकों के लिए नए अवसर खोले हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट सहित विभिन्न प्रयासों से प्रदेश को करीब 34 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले। इनमें से लगभग 30 प्रतिशत यानि 12 लाख करोड़ रुपये के निवेश को धरातल पर उतरे। मुख्यमंत्री ने निवेशकों को फरवरी में भाेपाल में होने वाली ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में आने का न्यौता भी दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश अब कृषि के साथ सेमीकंडक्टर, डीप टेक, इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण, फार्मा, टेक्सटाइल, रक्षा उत्पादन और दूरसंचार जैसे क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना रहा है। चिप डिजाइन, एडवांस पैकेजिंग, टेस्टिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। सेमीकंडक्टर नीति का जापानी, कोरियाई और ताइवानी भाषाओं में विमोचन भी निवेशकों को उनकी भाषा में प्रदेश की नीतियों से जोड़ने की पहल है।
मुख्यमंत्री ने इंदौर की हुकुमचंद मिल के श्रमिकों के बकाया भुगतान का उल्लेख करते हुए कहा कि मिल के सात हजार से अधिक श्रमिकों का करीब 300 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करवाया। इस तरह श्रमिकों को उनका हक मिला। यदि उद्योगपति समाधान नहीं कर पाते, तो श्रमिकों के हित में सरकार आगे आएगी।
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