
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : शहर में दिल्ली की तरह इंडिया गेट के कृतिनुमा गेट से सुसज्जित शहीद पार्क का ताला खुलने की उम्मीद आठ साल बाद अब जाग सकती है। संचालन के लिए तलाश कर चुके आईडीए को दो एजेंसियों ने रुचि दिखाई है। एजेंसियों को शहीद पार्क की गरिमा बनाए रखते हुए पार्क का संचालन करना होगा। शहीद गैलरी, ओपन एम्पी थिएटर और अस्थायी फूड हट्स से एजेंसियों की कमाई हो सकेगी।
वर्तमान में शहीद पार्क के इंडिया गेट पर आठ साल से ताला लगा है। आईडीए बोर्ड के सदस्यों ने मालवा के शहीदों से शहरवासियों को रूबरू करवाने की कल्पना करते हुए इसका निर्माण करवाया था। इसमें करीब 4 करोड़ खर्च हुए थे। निर्माण के बाद इसके संचालन के लिए आईडीए लगातार एजेंसी तलाश रहा है। तीन-चार बार टेंडर भी जारी कर चुका। पिछले दिनों आईडीए ने नई शर्तें बनाकर टेंडर जारी किया था, जिसमें दो एजेंसियों मेपल इन्क्राबुल और विंध्याचल एंटरप्राइजेस ने इसमें रुचि दिखाई। दोनों ही एजेंसियां हॉस्पिटैलिटी और सिक्योरिटी सर्विसेज से जुड़ी हैं। तकनीकी परीक्षण में खरी उतरी है। आगामी बोर्ड बैठक में स्वीकृत होने पर इसका संचालन शुरू हो सकेगा।
शहीद पार्क की रूपरेखा देशभक्ति से जुड़े आयोजनों के लिए की गई थी। गेट की डिजाइन दिल्ली के इंडिया गेट व पार्क के अंदर खूबसूरत फूलों के बीच अमर जवान ज्योति भी तैयार की गई। यहां तीनों सेनाओं के आधुनिक हथियारों की प्रतिकृति लगाई जाना है। एक आर्ट गैलरी है, जहां देशभक्ति की थीम पर म्यूजियम बनाया जा सकेगा। आर्ट, कल्चर व राष्ट्रभक्ति से संबंधित प्रदर्शनी लग सकेंगी। ओपन एम्पी थिएटर पर नुक्कड़ नाटक या अन्य खुले आयोजन हो सकेंगे।
पार्क करीब 2 एकड़ में बना है। इसे कल्चरल, ऐतिहासिक, शैक्षणिक और कला आयोजनों का केंद्र बना सकते हैं। संचालन के लिए एजेंसी को 75 हजार रुपए प्रतिमाह आईडीए को देना होंगे। 6 माह का एडवांस जमा करना होगा। 5 साल का अनुबंध होगा।
एजेंसी कमाई के लिए गैलरी, ओपन थिएटर, म्यूजियम का उपयोग कर प्रवेश शुल्क ले सकेगी। स्थायी निर्माण नहीं होगा, फूड कोर्ट के लिए अस्थायी आकर्षक हट्स बनाए जाएंगे। उम्मीद है, मेट्रो संचालन के बाद इस क्षेत्र में गतिविधियां बढ़ेंगी।
आईडीए को उम्मीद थी कि इसका संचालन सेना, बीएसएफ या सुरक्षा एजेंसियां करने को तैयार हो जाएंगी। शुरुआत में आईडीए ने आर्मी मुख्यालय महू, बीएसएफ, राज्य पुलिस सुरक्षा एजेंसियों, सैनिक कल्याण बोर्ड व सेवानिवृत्त सैनिकों की संस्थाओं से चर्चा की, लेकिन संचालन के लिए कोई तैयार नहीं हुआ। पिछले दिनों नगर निगम के इनकार के बाद आईडीए ने टेंडर जारी किए है।
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