इंदौर के प्राचीन शनि मंदिर में हुआ शनैश्चर जयंती महोत्सव का आगाज
इंदौर के प्राचीन शनि मंदिर में 75 वर्षों से प्रस्तुतियों की जो परंपरा चली आ रही थी उसे इस 76वें वर्ष में भी तकनीकी की मदद से निभाया गया। ...और पढ़ें
By Prashant PandeyEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Thu, 03 Jun 2021 02:22:51 PM (IST)Updated Date: Thu, 03 Jun 2021 02:28:34 PM (IST)

इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। एक बार फिर शनि के दरबार में स्वर लहरियां गूंजी, फिर रागमालाओं से भगवान की आराधना की गई, फिर उनके समक्ष कलाकारों ने अपनी हाजिरी लगाई लेकिन यह सब हुआ तकनीक की मदद से। शहर के प्राचीन शनि मंदिर में 75 वर्षों से प्रस्तुतियों की जो परंपरा चली आ रही थी उसे इस 76वें वर्ष में भी निभाया गया। फर्क यह था कि न प्रस्तुति देने कलाकार खुद मंदिर प्रांगण में आ सके और ना ही प्रस्तुतियों का आनंद लेने श्रोता वहां पहुंच सके पर इंटरनेट मीडिया के जरिए भगवान और उनके भक्तों ने प्रस्तुतियों को सुना और कलाकारों ने घर से ही प्रस्तुतियां देकर शनिदेव का आशीष प्राप्त किया।
नौ दिनी महोत्सव की शुरुआत बुधवार को शहर की गायिका रसिका गावड़े के गायन से हुई। रात्रि के प्रथम प्रहर में गाए जाने वाले केदार राग को चुनते हुए रसिका ने सुर साधे। ग्वालियर घराने का प्रतिनिधित्व करते हुए इन्होंने विलंबित और द्रुत लय में पारंपरिक बंदिशें सुनाई। अपनी गायकी में इन्होंने गमक, मीड, मुरकियों का भरपूर समावेश किया और यह इसलिए ही संभव हुआ क्योंकि ग्वालियर घराने की गायकी इन सब के समावेश का पूरा मौका देती है और उस पर कलाकार का रियाज उसे साकार कर पाता है। पारंपरिक बंदिश के बाद भक्ति रस वाला मीराबाई का भजन 'मतवारो बादर आयो रे' सुनाया। हारमोनियम पर रोहित अग्निहोत्री और तबले पर बालकृष्ण सनेचा ने इनका साथ बहुत ही खूबसूरती से दिया।
वादन से की शनि की आराधना : आयोजन के दूसरे पड़ाव में वादन की गूंज रही। तंतू वाद्य की मधुर तान लिए शनिदेव की आराधना की गई। इस पड़ाव में दिल्ली के डा. संतोष नाहर ने वायलिन वादन प्रस्तुत किया। तंतू वाद्य की प्रस्तुति की जब बात होती है तो अमूमन कलाकार राग किरवानी को नहीं चुनते क्योंकि यह छोटा राग माना जाता है। इसके विपरीत कलाकार ने इसी राग को चुना और तंत्र अंग के साथ गायकी अंग का समावेश करते हुए अपेक्षाकृत अधिक समय तक वादन किया। इसके बाद इन्होंने धुन भी सुनाई। कलाकार ने इलेक्ट्रानिक तबले की संगत के साथ अपनी प्रस्तुति बहुत ही उम्दा ढंग से दी। गुरुवार को ग्वालियर के यश देवले का गायन और इंदौर के मंगेश जगताप का संतुर वादन होगा।