एसआईआर और भागीरथपुरा घटनाक्रम ने इंदौर में थामे प्रशासनिक काम, सीमांकन और बटांकन रुका
प्रशासन ने औद्योगिक दुर्घटनाओं की रोकथाम और श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी औद्योगिक इकाइयों को 15 दिनों के भीतर अनिवार्य सेफ्टी आडिट कर ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 12 Jan 2026 09:59:44 AM (IST)Updated Date: Mon, 12 Jan 2026 10:10:54 AM (IST)
इंदौर कलेक्टर कार्यालय। फाइल फोटोHighLights
- तहसीलदार और नायब तहसीलदार स्तर के अधिकारी एसआईआर में दावे-आपत्तियों की सुनवाई में लगे
- राजस्व विभाग द्वारा किया जाने वाले बंटवारे और नामांतरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं
- इस वजह से अब आम नागरिकों के राजस्व प्रकरणों का निराकरण समय पर नहीं हो पा रहा है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत दावे-आपत्तियों की सुनवाई और भागीरथपुरा क्षेत्र में हुए गंभीर घटनाक्रम के चलते प्रशासनिक अमला पूरी तरह व्यस्त हो गया है। इसका सीधा असर जिले में चल रहे राजस्व अभियानों और औद्योगिक क्षेत्रों में प्रस्तावित सेफ्टी आडिट व निरीक्षण कार्यों पर पड़ा है। हालात ये हैं कि कई जरूरी प्रशासनिक गतिविधियां भी ठप पड़ी हुई हैं।
राजस्व विभाग द्वारा नियमित रूप से संचालित सीमांकन, बटांकन, बंटवारा और नामांतरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। तहसीलदार और नायब तहसीलदार स्तर के अधिकारी एसआईआर के तहत मतदाता सूची से जुड़े दावे-आपत्तियों की सुनवाई में लगाए गए हैं, जिससे आम नागरिकों के राजस्व प्रकरणों का निराकरण समय पर नहीं हो पा रहा है। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था की जांच होना थी।
प्रशासन ने औद्योगिक दुर्घटनाओं की रोकथाम और श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी औद्योगिक इकाइयों को 15 दिनों के भीतर अनिवार्य सेफ्टी आडिट कराने के निर्देश जारी किए थे। नए वर्ष से इन इकाइयों की जांच और निरीक्षण किया जाना था, लेकिन एसआईआर की सुनवाई और भागीरथपुरा घटनाक्रम के कारण कार्य शुरू नहीं हो सका। स्थिति यह है कि खतरनाक श्रेणी की फैक्ट्रियों के निरीक्षण के लिए गठित की जाने वाली विशेष टीम तक अभी नहीं बन सकी है।
विगत हुई प्रकरणों की समीक्षा
विगत दिनों कलेक्टर शिवम वर्मा ने जिले में राजस्व गतिविधियों की समीक्षा की थी। साथ ही सभी राजस्व अधिकारियों को एसआईआर के साथ राजस्व प्रकरणों का निराकरण प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भागीरथपुरा के घटनाक्रम के कारण प्रशासनिक अमला इसमें भी उलझा हुआ है।