
डिजिटल डेस्क, इंदौर। मध्य प्रदेश में अब पीढ़ियों से अपने मकान और आबादी भूमि पर रह रहे लोगों को मालिकाना हक का कानूनी दस्तावेज मिलने जा रहा है। 17 सितंबर यानी आज से राज्य में 'स्वामित्व योजना' के तहत लगभग 50 लाख निजी संपत्तियों की फ्री रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू हो रही है। इस योजना का शुभारंभ इंदौर से भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में होगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि पर बसे परिवारों के पास अक्सर संपत्ति का कोई रजिस्टर्ड कानूनी दस्तावेज नहीं होता था। इस समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में 'स्वामित्व योजना' की शुरुआत की। योजना के तहत गांवों की आबादी भूमि का ड्रोन सर्वे कर 'अधिकार अभिलेख' (प्रॉपर्टी कार्ड) तैयार किए गए। मध्य प्रदेश में अब तक 68.11 लाख अधिकार अभिलेख स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें 48.32 लाख रिकॉर्ड आम नागरिकों की निजी संपत्तियों से संबंधित हैं।
प्रॉपर्टी कार्ड केवल यह प्रमाणित करता है कि सरकारी सर्वे में संबंधित व्यक्ति का नाम दर्ज है। इसके उलट, रजिस्ट्री एक पंजीकृत कानूनी दस्तावेज (Registered Conveyance Deed) होती है, जिससे कानूनी रूप से मालिकाना हक पूरी तरह पक्का होता है।
पात्र हितग्राहियों को स्टांप ड्यूटी या पंजीयन शुल्क नहीं देना होगा। पूरी रजिस्ट्री प्रक्रिया का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। नागरिकों को रजिस्ट्री कार्यालय (रजिस्ट्रार ऑफिस) जाने की आवश्यकता नहीं होगी। ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष शिविर आयोजित कर डीड तैयार की जाएगी। यह योजना केवल उन लोगों के लिए है जिनका नाम पूर्व में आयोजित 'स्वामित्व योजना' के सर्वे में स्वीकृत हो चुका है। फिलहाल कोई नया आवेदन जमा नहीं किया जा रहा है, बल्कि पुराने तैयार रिकॉर्ड को ही कानूनी रजिस्ट्री का रूप दिया जा रहा है। पक्की रजिस्ट्री के साथ-साथ हितग्राहियों को दस्तावेज की डिजिटल कॉपी भी उपलब्ध कराई जाएगी।
योजना के क्रियान्वयन को लेकर पटवारियों ने अपनी मुख्य आपत्तियों के साथ विरोध जताया है। पटवारियों का कहना है कि यदि भविष्य में खसरा, नक्शा या ड्रोन सर्वे की मैपिंग में कोई गड़बड़ी या सीमा विवाद सामने आता है, तो कानूनी उलझनों की जिम्मेदारी उन पर आ सकती है।
इसके अलावा दस्तावेज में पटवारी को 'रजिस्ट्रीकर्ता' के रूप में नामांकित किए जाने को लेकर वे असहमत हैं। पटवारियों का तर्क है कि उनके पास भू-अभिलेखों के विवाद निपटाने या संशोधन करने की न्यायिक शक्तियां सीमित हैं, ऐसे में बिना स्पष्ट अधिकारों के उन पर अतिरिक्त कानूनी जिम्मेदारी डालना अनुचित है।
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कैबिनेट बैठक में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा द्वारा इस विषय को उठाए जाने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया शासन के -दिशानिर्देशों के तहत हो रही है। अतः पटवारियों को किसी कानूनी कार्रवाई से डरने की जरूरत नहीं है, और जिला कलेक्टरों को पटवारियों से संवाद कर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।