
नईदुनिया प्रतिनिधि इंदौर। इंदौर की गलियों में गणेशोत्सव के दौरान रात तक गूंजते भजन, हर गली में सजे पंडाल, अलग-अलग रूपों में सजे गणपति और दर्शन के लिए उमड़ती भीड़... यह माहौल विदेश में बसे इंदौरियों को भी खूब याद आता है।
हजारों किलोमीटर दूर रहने के बावजूद बप्पा के स्वागत की परंपरा उनके घरों में आज भी उसी श्रद्धा से निभाई जा रही है। कहीं घर में 11 दिन तक पूजा हो रही है तो कहीं सामूहिक पंडाल में हजारों भारतीय एक साथ गणेशोत्सव मना रहे हैं।
विदेशों में गणेशोत्सव का स्वरूप वहां की परिस्थितियों के अनुसार जरूर बदला है। नौकरी की व्यस्तता के कारण कहीं तीन या पांच दिन उत्सव होता है तो कहीं परिवार पूरे दस-ग्यारह दिन बप्पा को घर में रखते हैं। खास बात यह है कि कई जगह स्थानीय लोग भी भारतीय परिवारों के साथ पूजा और आरती में शामिल होकर गणेशोत्सव और भारतीय परंपराओं को करीब से समझ रहे हैं।
इंदौर में पढ़ाई और नौकरी के दौरान बिताए सालों की याद गणेशोत्सव के साथ जुड़ी हुई है। घर-घर दर्शन, अलग-अलग पंडाल और खजराना गणेश व बड़ा गणपति जाना आज भी याद आता है। ब्राजील में रहने वाली ज्ञानश्री करहे बताती हैं कि वे 17 साल से ब्राजील में हैं।
इस बार उनके घर 80 किलो की वर्जनी धातु की गणेश प्रतिमा को स्थापित कर उनकी पूजा की गई है। ज्ञानश्री बताती हैं कि यह प्रतिमा उनकी सास को एक भक्त ने भेंट की थी। ब्राजील में पहले दो परिवार ही दस दिन गणेशजी रखते थे, लेकिन इस बार दो और परिवारों ने पहल की।
कहती हैं कि इस बार का गणेशोत्सव इसलिए खास था क्योंकि उनके योग संस्थान में विद्यार्थियों और भारतीय मित्रों के साथ पूजा-आरती की गई। इसलिए इस बार का अनुभव कुछ खास ही रहा। ब्राजील में रहने वाले सभी लोग भारतीय परंपराओं को देखकर उत्साहित हुए कई सवाल किए कि इतना सब आयोजन घर पर ही कैसे कर लिया? घर की महिलाओं ने ही मिलकर प्रसाद, सजावत, पूजा की तैयारी कर ली।
ज्ञानश्री बताती हैं विसर्जन के लिए यहां पहले अनुमति ली जाती है। पास की नदी तक पूरा समुदाय बस से जाता है और नाव से नदी के बीच जाकर मिट्टी की प्रतिमा का विसर्जन करता है। फूल-माला नदी में डालने की अनुमति नहीं है। कीर्तन के साथ यह आयोजन सामूहिक उत्सव बन जाता है।
दस साल की उम्र में इंदौर से शुरू हुई गणेशोत्सव की परंपरा दुबई पहुंचने के बाद भी नहीं टूटी। 1992 में दुबई आने के बाद से हर साल घर में 11 दिन गणेशजी की स्थापना की जाती है। सुबह-शाम आरती होती है और परिवार, मित्र तथा पड़ोसी प्रसाद के लिए पहुंचते हैं।
चंद्रशेखर भाटिया बताते हैं कि दुबई में चाइनीज और फिलीपीन समुदाय के लोग भी गणेशजी के दर्शन के लिए आते हैं। वे गणेशजी को ‘एलिफेंट बुद्धा’ के रूप में समृद्धि से जोड़कर देखते हैं। उनका कहना है कि अलग-अलग समुदायों के बीच यह सांस्कृतिक मेलजोल गणेशोत्सव को और खास बना देता है।
दुबई में गणेश चतुर्थी की तैयारी घरों तक सीमित नहीं रहती। विभिन्न सुपरमार्केट में विशेष काउंटर सजाए जाते हैं, जहां गणपति प्रतिमा और पूजा से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। फ्रेंड्स आफ मध्य प्रदेश दुबई चैप्टर के सचिव मनोज वर्गिस बताते हैं कि हर त्योहार की तरह गणेश चतुर्थी को लेकर भी विशेष उत्साह रहता है। इन काउंटरों से विदेश में रहने वाले भारतीयों को अपनी परंपरा के अनुसार उत्सव मनाने के लिए जरूरी सामग्री आसानी से मिल जाती है।
अमेरिका के रेडमंड में 2019 से लगातार गणेशोत्सव हो रहा है। मुंबई से बनकर आई 15 फीट की प्रतिमा को ‘रेडमंड राजा’ नाम दिया गया है। रेडमंड डाउनटाउन पार्क में आयोजित उत्सव में करीब 20 हजार भारतीय-अमेरिकी पहुंचे। ‘बीट्स आफ रेडमंड’ के करीब 150 कलाकारों ने ढोल-ताशे बजाए।
12 हजार लड्डू और एक हजार फल प्रसाद में बांटे गए। यह जानकारी सीएटल में रहने वाले रत्ना और चिराग पटनी ने बताई। वे आगे बताते हैं कि सामूहिक आरती और ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारे उन्हें इंदौर की याद दिलाते हैं। स्थानीय लोग भी उत्साह से शामिल होकर भारतीय संस्कृति के बारे में सवाल पूछते हैं।
फ्रैंकलिन, टेनेसी में रहने वाली पूजा अजमेर सात साल से हर वर्ष दस दिन गणेशजी की स्थापना कर रही हैं। इन सातों वर्षों की प्रतिमाएं उन्होंने संभालकर रखी हैं और इंदौर आने पर उनका विसर्जन करने की योजना है। घर पर अलग-अलग तरह के मोदक बनाकर भोग लगाया जाता है और बच्चे सजावट में हिस्सा लेते हैं। उन्हें इंदौर की रात में गलियों और पंडालों में गणेश दर्शन करने की याद आज भी सबसे ज्यादा आती है।
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