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भागीरथपुरा दूषित पानी कांड : हादसे का इंतजार करते रहे अधिकारी, सात साल में लाइन नहीं बदली, मौतें हुई तो सात माह में बदल गईं

हाई कोर्ट में प्रस्तुत भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की जांच रिपोर्ट से रोजाना नए तथ्य सामने आ रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वर्ष 2018 में ही बता दि...और पढ़ें

By Kuldeep BhawsarEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Fri, 04 Sep 2026 09:02:29 PM (IST)Updated Date: Fri, 04 Sep 2026 09:02:29 PM (IST)
भागीरथपुरा दूषित पानी कांड : हादसे का इंतजार करते रहे अधिकारी, सात साल में लाइन नहीं बदली, मौतें हुई तो सात माह में बदल गईं
जानकारी होने के बावजूद भागीरथपुरा में नहीं बदली गई पाइप लाइन। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वर्ष 2018 में ही बता दिया था कि पानी दूषित है
  2. अधिकारियों ने सात साल तक पाइप लाइन बदलने को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई
  3. दूषित पानी की वजह से भागीरथपुरा में मौतें होने लगी तो अधिकारियों की नींद खुली

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : हाई कोर्ट में प्रस्तुत भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की जांच रिपोर्ट से रोजाना नए तथ्य सामने आ रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वर्ष 2018 में ही बता दिया था कि भागीरथपुरा सहित शहर के कई क्षेत्रों में बोरिंग दूषित पानी उगल रहे हैं। बावजूद इसके नगर निगम के अधिकारियों ने सात साल तक पाइप लाइन बदलने को लेकर गंभीरता नहीं जताई।

दिसंबर 2025 के अंत में जब दूषित पानी की वजह से भागीरथपुरा में मौतें होने लगी तो अधिकारियों की नींद खुली। सात साल से अटकी पाइप लाइनें सिर्फ सात माह में बदल दी गईं। कोर्ट में प्रस्तुत रिपोर्ट में आयोग ने अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। 110 पेज के निष्कर्ष में कोर्ट ने हादसे के लिए निगम के आधा दर्जन अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। कोर्ट ने माना कि समय रहते ये अधिकारी जाग जाते तो हादसा नहीं होता।


रिपोर्ट को हल्के में लेते रहे अधिकारी

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वर्ष 2018 में दी अपनी रिपोर्ट पेश करने के साथ इस बात की चेतावनी भी दी थी कि नालों के आसपास के बोरिंग दूषित पानी दे रहे हैं। कई रहवासी क्षेत्रोंं में लोग इस पानी को रोजमर्रा के कामकाज में उपयोग करने के साथ-साथ पीने के लिए भी इस्तेमाल कर रहे हैं।

यह स्थिति किसी भी दिन खतरनाक साबित हो सकती है, लेकिन जिम्मेदारों ने इस रिपोर्ट और चेतावनी को गंभीरता से लिया ही नहीं। उनकी यह लापरवाही भागीरथपुरा के रहवासियों पर भारी पड़ गई। दिसंबर 2025 की शुरुआत से ही भागीरथपुरा में लोग बीमार होने लगे थे, लेकिन इस तरफ न स्वास्थ्य विभाग ने ध्यान दिया न नगर निगम ने। 28 दिसंबर को जब बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोगों के बीमार होने की खबरें सामने आई और केबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अधिकारियों पर इसे लेकर नाराजगी जताई तो अधिकारी हरकत में आए।

पिछले कई माह से कर रहे थे शिकायत

जांच रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि भागीरथपुरा के रहवासी सितंबर 2025 से ही जनप्रतिनिधियों से पानी दूषित आने की शिकायत कर रहे थे, लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। आयोग के समक्ष एक दर्जन से ज्यादा रहवासियों ने इसकी पुष्टि की है। इन लोगों का कहना था कि जनप्रतिनिधि उनकी शिकायत सुनने के बाद सिर्फ इतना कहते थे कि दिखवाते हैं।

25 किमी से ज्यादा लाइन है भागीरथपुरा में

भागीरथपुरा क्षेत्र में पानी के पाइप लाइन की लंबाई करीब 25 किमी है। शासन की दो बड़ी योजनाओं में इन लाइनों को बदलने के लिए पैसा तो आया लेकिन कभी काम नहीं हुआ।

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