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नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। नगर निगम सात दिन बाद भी भागीरथपुरा में साफ-स्वच्छ नर्मदा जल उपलब्ध नहीं करवा पाया। रहवासी अब भी पूरी तरह से टैंकरों पर आश्रित हैं। उनका कहना है कि निगम भले ही सब कुछ ठीक होने का दावा कर रहा है, लेकिन हालात वैसे नहीं हैं जैसे बताए जा रहे हैं। शनिवार को एक टैंकर में काई मिलने के बाद रहवासियों का आक्रोश फूट पड़ा। उन्होंने पानी लिए बगैर ही टैंकर लौटा दिया। चिंता की बात यह है कि सात दिन बाद भी स्पष्ट नहीं हो सका कि भागीरथपुरा में मल-मूत्र मिला पानी लोगों के घरों तक पहुंचा कैसे था।
यह बात इससे भी पुष्ट होती है कि पुलिस चौकी के पास नर्मदा की मेनलाइन में मिला लीकेज सुधारने के चार दिन बाद भी भागीरथपुरा क्षेत्र में नर्मदा जल सप्लाय नियमित नहीं हो सका है। आशंका जताई जा रही है कि सिर्फ पुलिस चौकी ही नहीं क्षेत्र में कई जगह हैं जहां पानी की लाइन में लीकेज हैं। इधर शनिवार को भागीरथपुरा में भाजपा-कांग्रेस के नेता, कार्यकर्ता आमने-सामने हो गए। देर तक हंगामा होता रहा। शनिवार को क्षेत्र में उल्टी दस्त के 65 नए मरीज मिले।
इनमें से 15 को इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती करना पड़ा, जबकि शेष को प्राथमिक इलाज के बाद घर रवाना कर दिया गया। इधर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की टीम ने शनिवार को भागीरथपुरा क्षेत्र में सघन दौरा किया। टीम के सदस्य अस्पतालों में भर्ती मरीजों से मिलने भी पहुंचे। निगम ने बंद करवाए बोरिंग नगर निगम ने भागीरथपुरा के सभी बोरिंग बंद करवा दिए हैं। निगमकर्मियों ने इन बोरिंग की बिजली सप्लाय ही बंद कर दी है। क्षेत्र के नलकूपों का पानी दूषित होने की आशंका है।
कहा जा रहा है कि जांच के बाद ही इन्हें खोला जाएगा। ऐसी स्थिति में भागीरथपुरा के रहवासी पूरी तरह से निगम द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं। काई की शिकायत के बाद लौटाया टैंकर नगर निगम जिन टैंकरों से क्षेत्र में पानी उपलब्ध करवा रहा है उनमें से ज्यादातर टैंकर पुराने और जंग खाए हैं। शनिवार सुबह भागीरथपुरा में पानी बांटने पहुंचे एक टैंकर में काई जमी मिली जिसके बाद रहवासियों ने विरोध करते हुए इसे लौटा दिया।
रहवासियों का कहना है कि टैंकरों के माध्यम से बांटा जा रहा पानी भी सीधे पीने के उपयोग लायक नहीं है। शनिवार को मिले 65 मरीज भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त के मरीजों के मिलने का सिलसिला शनिवार को भी जारी रहा। इस दिन 65 नए मरीज मिले। इनमें से 15 को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया। वर्तमान में 149 मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें से 20 को आइसीयू में रखा गया है।
कांग्रेस नेता शनिवार दोपहर भागीरथपुरा पहुंचे। विधायकों, पूर्व मंत्री और कांग्रेस पदाधिकारी दूषित जल से प्रभावित परिवारों से मिलना और क्षेत्र का सर्वे करना चाहते थे। वे रहवासियों के यहां पहुंच पाते इससे पहले ही भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें रोक दिया। पुलिस सुरक्षा के बीच पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा, विधायक महेश परमार, प्रताप ग्रेवाल बस्ती में दाखिल हुए तो भाजपा कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाते हुए धक्का-मुक्की शुरू कर दी। इस बीच चूड़िया और जूते-चप्पल भी फेंके जाने लगे। इस बीच कांग्रेसी कार्यकर्ता भी एकत्रित हो गए। दोनों पक्षों से नारेबाजी शुरू हो गई।
पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाइश देने का प्रयास किया लेकिन कांग्रेस नेताओं ने वापस जाने से इनकार कर दिया। भाजपा कार्यकर्ताओं की भीड़ भी हटने को तैयार नहीं हुई। देखते ही देखते हंगामा बढ़ गया। इस बीच युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कैलाश विजयवर्गीय के खिलाफ नारेबाजी शुरू की तो भाजपाई और भड़क गए। इस बीच पुलिस से भी धक्कामुक्की होने लगी।
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पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर कांग्रेस नेताओं को बस्ती से बाहर निकाला और दोनों विधायक, पूर्व मंत्री, प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना सेतिया, शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे, राजेश चौकसे, गिरधर नागर, युवा कांग्रेस अध्यक्ष अमित पटेल समेत कुल 45 कांग्रेसियों को बीएनएस की धारा 170 में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।एक घंटे बाद कांग्रेस नेताओं को मुचलके पर रिहा भी कर दिया गया। विधायक पटेल और परमार ने कहा कि भागीरथपुरा में राजनीतिक सरंक्षण में हत्याएं की गई है।
इन हत्याओं को दबाने के लिए अब भाजपा वाले गुंडागर्दी कर रहे हैं। सज्जनसिंह वर्मा ने तो आरोप लगाया कि कैलाश विजयवर्गीय ने हंगामा करवाने के लिए किराए के बदमाश बुलाकर कांग्रेस नेताओं पर हमले की कोशिश की।