
इंदौर (Tourist Places Near Indore)। सावन के महीने में अगर किसी ऐसे स्थान पर जाने का अवसर मिल जाए, जहां भगवान शिव के भी दर्शन हो जाएं और हरीभरी वादियों के बीच वक्त बीताने को भी मिल जाए तो कहना ही क्या। किसी और के लिए यह एक टास्क हो सकता है पर हम इंदौरियों के लिए यह बहुत आसान बात है।
ऐसे स्थान को तलाशने के लिए हमें न तो बहुत ज्यादा दिमागी घोड़े दौड़ाने की जरूरत है और न ही शहर से बहुत दूर जाने की जहमत उठाने की जरूरत। शहर के आसपास यूं तो कई ऐसे स्थान हैं, जहां यह तलाश पूरी हो सकती है और इन्हीं में से एक है देवगुराड़िया मंदिर और उसके आसपास की वादियां।
बहुत कम लोग यह जानते हैं कि देवगुराड़िया में भगवान शिव के प्राचीन मंदिर के दर्शन करने के अलावा आसपास प्राकृतिक नजारों का आनंद लिया जा सकता है। चलिए अपनी यात्रा इस बार इसी दिशा में करते हैं। शुरुआत इंदौर से ही करते हैं।
श्रावण मास है इसलिए राजवाड़ा में बने मल्हारी मार्तंड मंदिर में पहले भगवान शिव के दर्शन कर यात्रा की शुरुआत करते हैं और फिर जाते हैं देवगुराड़िया। यह भी वह मंदिर है, जिसके जीर्णोद्धार की जिम्मेदारी अहिल्याबाई होलकर ने निभाई थी। यहां जब शिवलिंग पर गोमुख से जलाभिषेक होना शुरू हो जाता है तो माना जाता है कि उस वर्ष वर्षा पर्याप्त हुई।

पहाड़ों से रिसकर यह जल गोमुख से होता हुआ शिवलिंग का अभिषेक करता है। इसके बाद यात्रा बढ़ाते हैं और चलते हैं प्राकृतिक नजारों का आनंद लेने। इंदौर से करीब 55 किमी दूर और देवगुराड़िया से करीब 40 किमी दूर यह यात्रा पूरी होती है। पर इस यात्रा में कई प्राकृतिक और पर्यटक स्थल आपको मिलेंगे।
मेघदूत फिटनेस क्लब के महेश रसाल बताते हैं कि जब आप देवगुराड़िया वाले रास्ते से ग्राम कंपेल की और जाते हैं तो रास्ते में उज्जैनी स्थान आता है जहां नर्मदा और क्षिप्रा का संगम है। यहां भी आप पिकनिक मना सकते हैं। यहां से थोड़ा आगे बढ़ते हैं कंपेल गांव पहुंचेंगे।
कंपेल का स्थान इतिहास के पन्नों पर प्रमुख है, क्योंकि कभी होलकर शासक भी यहां रहे थे और कंपेल परगना हुआ करता था। यहां से थोड़ा आगे बढ़ने पर आप हत्यारी खोह पिकनिक स्पाट का लुत्फ ले सकते हैं। यहां भी बहुत आकर्षक झरना है, जो सबको लुभाता है।

महेश रसाल बताते हैं कि यदि इन स्थानों पर जा रहे हैं तो खानपान की वस्तुएं साथ लेकर जाएं, क्योंकि इन स्थानों पर चाय-काफी तो मिल सकती है, लेकिन उससे ज्यादा की उम्मीद करना बेमानी बात होगी। हां, ग्रामीण क्षेत्र होने से भुट्टों का आनंद आप भरपूर ले सकते हैं।
पेडमी घाट पर बंदरों से जरा सावधान रहें। खासतौर पर तब, जब आपके हाथ में खाद्य पदार्थ हों। यहां थोड़ी सतर्कता रखें, क्योंकि जरा सी लापरवाही दुर्घटना की वजह बन सकती है। हत्यारी खोह हो या पेडमी घाट फिसलन भरे स्थान हैं और यहां अक्सर अप्रिय घटनाएं होती हैं।
देवगुराड़िया, उज्जैनी और हत्यारी खोह के बाद आप जब अन्य प्राकृतिक स्थान की खूबसूरती देखने बढ़ते हैं तो करीब पांच किमी चलने के बाद पेडमी गांव आता है। यहां खेड़ापति हनुमान मंदिर है, जिसकी क्षेत्र में खासी मान्यता है।
यह आपकी यात्रा का अंतिम पड़ाव होगा, क्योंकि यहीं आपको पेडमी घाट मिलेगा, जहां एक नहीं बल्कि तीन झरने हैं। पहाड़ों से घिरे इस क्षेत्र में असीम हरियाली है और बेतहाशा खूबसूरती। शांत वातावरण और झरनों की आवाज मन को प्रफुल्लित कर देती है।
यह ऐसा स्थान है जहां घंटों वक्त बिताया जा सकता है। यहां की सुंदर घाटियां हिमाचल प्रदेश सा अहसास कराती हैं। अगर आप थोड़ा और वक्त है तो आप सती गेट देखने भी जा सकते हैं जो कि यहां से कुछ ही दूरी पर है और यह होलकर कालीन द्वार है।