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इंदौर का सांवेर रोड औद्योगिक क्षेत्र : दो हजार इकाइयों के वाहन डेढ़ फीट गड्ढों और कीचड़ से निकलने को मजबूर

दो हजार से ज्यादा इकाइयों के भारी-हल्के व्यावसायिक वाहन रोज इसी मार्ग से मजबूरन गुजरते हैं, दो पिकअप भी मुश्किल से निकलते हैं।

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Fri, 28 Aug 2026 11:03:21 AM (IST)Updated Date: Fri, 28 Aug 2026 11:12:49 AM (IST)
इंदौर का सांवेर रोड औद्योगिक क्षेत्र : दो हजार इकाइयों के वाहन डेढ़ फीट गड्ढों और कीचड़ से निकलने को मजबूर
सांवेर रोड इंडस्ट्रियल एरिया (सेक्टर-सी) के पीछे एमआर-4 से जुड़ी एलसी-54 रेलवे क्रासिंग बड़ी परेशानी, सड़क बनी तालाब।

HighLights

  1. एमआर-4 क्रासिंग पर रेलवे ओवरब्रिज बनाने की फिलहाल योजना नहीं
  2. सांवेर रोड औद्योगिक क्षेत्र की सड़क बारिश में तालाब बन गई हैं
  3. डेढ़-दो फीट गहरे गड्ढे और कीचड़ से वाहन इनमें फंस जाते हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर में सभी रेलवे लेवल क्रासिंग बंद कर रेलवे ओवरब्रिज बनाने की योजना अभी तक अधूरी है। सांवेर रोड इंडस्ट्रियल एरिया (सेक्टर-सी) के पीछे एमआर-4 से जुड़ी एलसी-54 रेलवे क्रांसिंग प्रशासन के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। उक्त सड़क वर्षाकाल में तालाब में परिवर्तित हो चुकी है। यहां न तो रेलवे ओवरब्रिज बनाने की कोई योजना शुरू हो पाई है और न ही महज 500 मीटर की जर्जर सड़क को सुधारने की सुध जिम्मेदारों द्वारा ली जा रही है।

औद्योगिक क्षेत्र की लगभग दो हजार से ज्यादा इकाइयों के भारी और हल्के व्यावसायिक वाहन रोज इसी पांच मीटर चौड़ी संकरी सड़क से गुजरने को मजबूर हैं। इस मार्ग पर वर्षाकाल के दिनों में डेढ़ से दो फीट गहरे गड्ढे और कीचड़ से हादसों की आशंका बनी रहती है। बड़े और गहरे गड्ढों के कारण वाहन फंस जाते हैं, जिन्हें फिर क्रेन की मदद से निकालना पड़ता है। साथ ही वाहनों के पलटने का खतरा भी रहता है।


एमआर-4 से लगे दो प्रमुख रेलवे ओवरब्रिज बाणगंगा और पोलोग्राउंड पर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा पिछले तीन सालों से रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। निर्माण कार्य धीमी गति से चलने के कारण दोनों रेलवे ओवरब्रिज तीन साल से वाहन चालकों के लिए बंद पड़े हैं।

मजबूरन औद्योगिक क्षेत्र में आवागमन के लिए सैकड़ों वाहन चालकों को रोजाना पटरी पार करने के लिए पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड या एमआर-10 होकर लंबा घुमावदार चक्कर लगाना पड़ रहा है। इसके चलते सारे भारी और हल्के व्यावसायिक सहित अन्य वाहनों का बोझ एलसी-54 रेलवे क्रासिंग पर आ गया है।

आसपास के रास्ते बंद होने से पूरा औद्योगिक यातायात इस पांच मीटर संकरे मार्ग पर आ गया है, जहां एक साथ दो पिक-अप ट्रक भी बड़ी मुश्किल से निकल पाते हैं।

सड़क बनाने को तैयार, धमका रहे गुंडे

उद्योगपति एसोसिएशन आफ इंडस्ट्रीज मध्यप्रदेश के अध्यक्ष योगेश मेहता और सचिव तरुण व्यास के अनुसार जिला उद्योग केंद्र ने सड़क बनाने की अनुमति दे दी है। उद्योगपति अपनी ओर से 80 लाख रुपये खर्च कर निजी ठेकेदार से कंक्रीट की सड़क बनाने को तैयार हैं, लेकिन तीन से चार स्थानीय गुंडे सड़क निर्माण नहीं करने दे रहे हैं।

गुंडे उद्योगपतियों पर दबाव बना रहे हैं कि हम कंक्रीट सड़क के साथ ड्रेनेज लाइन भी डालें जबकि हमारा कहना है कि ड्रेनेज लाइन डालना उद्योगपतियों का काम नहीं है। उद्योगपति डर के माहौल में काम कैसे करेंगे? वहीं, काम शुरू करने पर वाहनों के लिए रास्ता बंद होगा। आसपास के दोनों ओवरब्रिज का काम अधूरा है। एसोसिएशन की तरफ से हमने बाणगंगा और पोलोग्राउंड ब्रिज का काम जल्द पूरा कराने और एलसी-54 पर भी ब्रिज बनवाने को लेकर कलेक्टर शिवम वर्मा को कई बार पत्र लिखा है, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही।

चार लाख रुपये की डलवाई मुरम

नगर निगम की ओर से इस 500 मीटर के हिस्से में गिट्टी-मुरम तक नहीं डाली गई। सड़क का हिस्सा इतना कच्चा है कि इस पर कभी पक्की सड़क बनी ही नहीं। एसोसिएशन आफ इंडस्ट्रीज मध्य प्रदेश के सदस्यों ने पिछले साल खुद चार लाख रुपये लगाकर मुरम डलवाई थी।

इस बार उद्योगपति अपने खर्च पर 80 लाख रुपये लगाकर कंक्रीट रोड बनाने को तैयार हैं, लेकिन ट्रैफिक डायवर्शन का कोई विकल्प न होने से काम अटका है। सड़क निर्माण के लिए रास्ता बंद किया जाता है तो एक किलोमीटर के क्षेत्र में ट्रकों को पटरी पार करने का कोई दूसरा रास्ता ही नहीं मिलेगा। इससे वाहन चालकों को परेशानी होगी।

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