नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मध्य प्रदेश में तेजी से कम हो रही गिद्धों की संख्या को लेकर वन विभाग अब गंभीर हो गया है। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सक्रिय विभाग ने फैसला किया है कि अब साल में दो बार गिद्धों की गणना की जाएगी। सर्दियों और गर्मियों दोनों मौसम में इनकी गिनती कर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा।
बीते दिनों इंदौर वनमंडल में गणना को लेकर वनकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इंदौर, महू, चोरल और मानपुर रेंज के कर्मचारियों को गिद्धों की पहचान, गिनती की प्रक्रिया और जरूरी दिशा-निर्देश समझाए गए।
तीन दिनों तक विशेष अभियान चलाया जाएगा
अधिकारियों के मुताबिक 20 फरवरी से तीन दिनों तक विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान 38 चिन्हित स्थानों पर सुबह 6 से 8 बजे तक टीमें मैदान में उतरेंगी। प्रदेश में गिद्धों की गिनती 2016 से हो रही है। तब 33 जिलों के 900 से अधिक स्थानों को चुना गया था।
हर बार सुबह के समय ही गिनती की जाती है, क्योंकि उस समय गिद्ध खुले स्थानों या पेड़ों पर बैठे मिलते हैं। खाली जमीन और पेड़ों पर बैठे गिद्धों की संख्या दर्ज की जाती है और उनकी फोटोग्राफी भी की जाती है। ताकि रिकॉर्ड सुरक्षित रहे।
इंदौर वनमंडल में सबसे ज्यादा इजिप्शियन गिद्ध
प्रदेश में प्रमुख रूप से इजिप्शियन गिद्ध, वाइट रम्प्ड, किंग वल्चर, लांग बिल्ड और यूरेशियन प्रजाति के गिद्ध पाए जाते हैं। इंदौर वनमंडल में सबसे ज्यादा इजिप्शियन गिद्ध मिलते हैं, जिनकी गर्दन और शरीर सफेद तथा चोंच पीले रंग की होती है।
इन स्थानों पर जाएंगी टीमें
गिनती के लिए पेडमी, कजलीगढ़, पातालपानी, देवगुराड़िया (ट्रेंचिंग ग्राउंड), आशापुरा, रतवी, गिद्ध खोह (सिवनी), कंपेल और तिंछा फाल सहित 38 स्थान तय किए गए हैं। 40 से अधिक वनकर्मियों की टीम इस जिम्मेदारी को निभाएगी।
रेंजर संगीता ठाकुर का कहना है कि तीन दिनों तक गिद्धों की गणना होगी। साथ ही फोटोग्राफी की जाएगी। इनसे जुड़े प्रमाण का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा।
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लगातार घट रहे गिद्ध
प्रदेश से गिद्ध लगातार कम हो रहे हैं। इनके आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। 2016 में इंदौर वनमंडल में 284 गिद्ध थे, जो 2019 में घटकर 97 रह गए। 2021 में 117, 2023 में 114 और 2025 में सिर्फ 86 गिद्ध दर्ज किए गए। लगातार घटती संख्या ने संरक्षण की जरूरत को और भी अहम बना दिया है।
हर साल अब दो बार गणना की जाएगी। इंदौर वनमंडल में 16 टीमें बनाई गई हैं। प्रत्येक रेंज में चार-चार टीमें हैं, जो तीन से चार स्थान पर गणना करेंगी। फरवरी होने के बाद अप्रैल में ग्रीष्मकालीन गणना होगी। यह सिर्फ एक दिन की जाएगी।
-लाल सुधाकर सिंह, डीएफओ, इंदौर वनमंडल