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इंदौर में गहराया जल संकट, अब हर शहरवासी रोज बचाएगा एक लीटर पानी, घरों से लेकर स्कूल तक चलेगी मुहिम

कम बारिश के चलते शहर में जल संकट की चिंता बढ़ने लगी है। भूमिगत जलस्तर नीचे जाने से कई बोरिंग में पानी कम आने लगा है। ऐसे में पानी की हर बूंद बचाने के ...और पढ़ें

By Kapil NileyEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 18 Oct 2026 08:57:42 PM (IST)Updated Date: Sun, 18 Oct 2026 08:57:42 PM (IST)
इंदौर में गहराया जल संकट, अब हर शहरवासी रोज बचाएगा एक लीटर पानी, घरों से लेकर स्कूल तक चलेगी मुहिम
इंदौर में जल संकट से निपटने अनूठी पहल।

HighLights

  1. इंदौर में जल संकट से निपटने अनूठी पहल
  2. 'अमृत-संचय' संस्था ने शुरू किया अभियान
  3. रोजाना 1 लीटर पानी बचाने की अपील की गई

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। कम बारिश के चलते शहर में जल संकट की चिंता बढ़ने लगी है। भूमिगत जलस्तर नीचे जाने से कई बोरिंग में पानी कम आने लगा है। ऐसे में पानी की हर बूंद बचाने के लिए समाजसेवी संस्थाएं भी आगे आ रही हैं। रविवार को समाजसेवी संस्था अमृत-संचय ने बिचौली मर्दाना स्थित जैविक सेतु पर जल संरक्षण को लेकर परिचर्चा आयोजित की।

इसमें शहर के समाजसेवियों और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लेकर पानी बचाने के व्यावहारिक उपायों पर चर्चा की। बैठक में ‘इंदौर अमृत संचय अभियान’ के माध्यम से शहरभर में जनजागरूकता फैलाने पर जोर दिया गया।

रोजाना कम से कम एक लीटर पानी बचाने की अपील

परिचर्चा में तय किया गया कि जल संकट से निपटने के लिए हर नागरिक को अपनी आदतों में बदलाव करना होगा। लोगों से रोजाना कम से कम एक लीटर पानी बचाने की अपील की जाएगी। नलों में एरेटर लगाने, पानी की धार कम रखने, जरूरत के अनुसार ही गिलास भरने और टपकते नलों को तुरंत ठीक कराने सहित छोटे कदमों से बड़ी बचत हो सकती है। कारों को रोज पानी से धोने के बजाए सूखे कपड़े से साफ करने की सलाह भी दी गई।


आरओ के बचे पानी का भी होगा इस्तेमाल

बैठक में आरओ से निकलने वाले पानी को फेंकने के बजाए पोछा लगाने, सफाई और अन्य उपयुक्त कामों में इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया। छत की टंकियों में आटोमैटिक कट-आफ स्विच लगाने और घरों में वर्षा जल संचयन व्यवस्था विकसित करने की जरूरत भी बताई गई। इसके लिए रेत और कंकड़ वाले फिल्टर जैसे किफायती विकल्प बताए गए।

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स्कूलों से धार्मिक स्थलों तक पहुंचेगा संदेश

जनक पलटा, डॉ सुनील चतुर्वेदी, सुरेश एमजी, अंबरीश केला, संदीप खानवलकर सहित अन्य लोगों ने विचार रखे। मस्जिद-ए-हबीब के इमाम शेख सहिरुद्दीन, मौलाना मोहम्मद शकील, नईम और असलम पालवाला ने भी चर्चा में भाग लिया।

अभियान के तहत स्कूलों, कालेजों, उद्योगों, बहुमंजिला इमारतों और धार्मिक स्थलों पर जागरूकता गतिविधियां चलाने का सुझाव दिया गया। मोबाइल कार्यशालाओं, सोशल मीडिया और स्थानीय स्वयंसेवकों की मदद से लोगों को पानी बचाने के तरीके बताए जाएंगे। कुओं और बावड़ियों की सफाई तथा जल संचयन के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।