केंद्र की भूजल नीति लागू करने के लिए क्या किया?, इंदौर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा- क्या उठाए कदम
केंद्र शासन ने वर्ष 2019 में भूजल नीति तैयार कर ली थी। राज्य शासन को इस नीति के क्रियान्वयन पर काम करना था। शासन बताए कि उसने अब तक इस दिशा में क्या क...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 23 Oct 2026 10:19:28 AM (IST)Updated Date: Fri, 23 Oct 2026 10:32:04 AM (IST)
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से किया सवाल। -एआई इमेजHighLights
- केंद्र शासन ने वर्ष 2019 में भूजल नीति तैयार कर ली थी
- राज्य शासन को इस नीति के क्रियान्वयन पर काम करना था
- शासन बताए कि उसने अब तक इस दिशा में क्या कदम उठाए
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : केंद्र शासन ने वर्ष 2019 में भूजल नीति तैयार कर ली थी। राज्य शासन को इस नीति के क्रियान्वयन पर काम करना था। शासन बताए कि उसने अब तक इस दिशा में क्या कदम उठाए। यह सवाल मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने राज्य शासन से किया है।
पिछले पांच वर्ष में कई बदलाव हो चुके हैं
शासन के वकील ने कोर्ट को बताया कि याचिका में पिछली सुनवाई सितंबर 2021 में हुई थी। पिछले पांच वर्ष में कई बदलाव हो चुके हैं। इसलिए शासन को जवाब के लिए समय चाहिए। कोर्ट ने सुनवाई आगे बढ़ाते हुए कहा कि अगली सुनवाई पर शासन इस दिशा में स्थिति स्पष्ट करे। अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।
हाई कोर्ट में जनहित याचिका वर्ष 2019 में प्रस्तुत की थी
हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका भविष्य शर्मा ने एडवोकेट मनीष विजयवर्गीय के माध्यम से वर्ष 2019 में प्रस्तुत की थी। कहा है कि वर्ष 1996 में सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी ने भूजल बचाने के संबंध में नीति तैयार करने के निर्देश केंद्र को दिए थे। केंद्र ने वर्ष 2019 में नीति तैयार कर भी दी।
याचिका पर पिछली सुनवाई सितंबर 2019 में हुई थी
चूंकि भूजल राज्य का विषय है इसलिए इस नीति का क्रियान्वयन राज्य को करना था, लेकिन इस संबंध में कोई काम नहीं किया गया। याचिका की पिछली सुनवाई सितंबर 2019 में हुई थी। गुरुवार को हुई सुनवाई में एडवोकेट विजयवर्गीय ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2019 में ही आशंका जताई जा चुकी थी कि देश के 70 शहरों में भूजल लगभग समाप्त हो जाएगा। अगर समय रहते राज्य केंद्र द्वारा तैयार नीति का क्रियान्वयन कर लेता तो ऐसे हालात नहीं बनते। कोर्ट ने तर्क सुनने के बाद राज्य शासन से नीति के क्रियान्वयन के संबंध में स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा है।