
कपिल नीले, नईदुनिया, इंदौर। जंगलों और आसपास के इलाकों में घायल या बीमार मिलने वाले वन्यजीवों को अब इलाज के लिए चिड़ियाघर और वन विहार में नहीं भेजना पड़ेगा। जल्द ही रालामंडल अभयारण्य में ही उनके उपचार की सुविधा मिल सकेगी। इसके लिए इंदौर वनमंडल ने अभयारण्य में रेस्क्यू सेंटर बनाने को लेकर एक बार फिर कवायद तेज कर दी है।
वनमंडल ने प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय को भेज दिया है। खास बात यह है कि करीब दस साल बाद रालामंडल में वेटरनरी डॉक्टर की नियुक्ति हुई है, जिससे इस योजना को आगे बढ़ाने की उम्मीद बढ़ी है।
234 हेक्टेयर में फैले रालामंडल अभयारण्य में रेस्क्यू सेंटर के लिए करीब 15 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई है। यहां एक वेटरनरी डिस्पेंसरी बनाई जाएगी, जहां बीमार और घायल वन्यजीवों को प्राथमिक उपचार मिल सकेगा। इसके अलावा जानवरों को कुछ समय तक सुरक्षित रखने के लिए दो बाड़े बनाए जाएंगे।
आधुनिक पिंजरों की व्यवस्था भी होगी। सेंटर में तीन से चार मेडिकल स्टाफ, जरूरी दवाइयां और उपचार से जुड़े उपकरण रखे जाएंगे। भवन निर्माण के लिए अधिकारियों ने बजट की मांग भी की है। वाइल्ड लाइफ वार्डन और वन अधिकारियों की प्रस्तावित बैठक के बाद सेंटर की विस्तृत रूपरेखा तैयार होगी।
रेस्क्यू सेंटर की जरूरत हाल की घटनाओं से भी सामने आई है। पिछले सप्ताह चोरल के मेंडल तालाब के पास से पकड़े गए वायरल फीवर से पीड़ित तेंदुए का इलाज रालामंडल में ही डॉ. निखिल बालके की निगरानी में किया जा रहा है। वहीं दो दिन पहले उमरिया खुर्द में एक तेंदुआ अज्ञात वाहन की टक्कर से गंभीर रूप से घायल हो गया। उसका चेहरा बुरी तरह क्षतिग्रस्त है और एक आंख भी खराब हो चुकी है। खुले घाव में कीड़े पड़ने के कारण उसकी हालत गंभीर है। फिलहाल उसे बेहतर इलाज और सर्जरी के लिए वन विहार भेजा गया है।
रालामंडल की रेस्क्यू टीम पर इंदौर-खंडवा सर्कल के करीब आठ वनमंडलों का जिम्मा है। टीम इंदौर, धार, आलीराजपुर, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, बड़वाह और बुरहानपुर सहित अन्य क्षेत्रों में वन्यजीवों का रेस्क्यू करती है। इसके बावजूद टीम के पास सिर्फ एक रेस्क्यू वाहन और दो ट्रैंकुलाइजर गन हैं। इन्हें चलाने के लिए प्रशिक्षित वनकर्मी भी सिर्फ एक है। यहां तक कि अनुभवी स्टाफ भी नहीं है।
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2020 के बाद अब रालामंडल में रेस्क्यू सेंटर बनाने की जरूरत महसूस होने लगी है। अभयारण्य में सेंटर का प्रस्ताव भेजा गया है। पिछले कुछ वर्षों में रिहायशी इलाकों में जानवरों का मूवमेंट बढ़ गया है। इन्हें रेस्क्यू करने के बाद चिड़ियाघर में भी नहीं रखा जा सकता है, क्योंकि उनके पास भी जगह कम है। हालांकि रालामंडल के अलावा मुख्यालय को अन्य रेस्क्यू सेंटर बनाने का विकल्प दिया है। महू वेटरनरी कॉलेज में जगह मांगी है। - लाल सुधाकर सिंह, डीएफओ, इंदौर वनमंडल