
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : भागीरथपुरा दूषित पानी कांड के दौरान गंभीर रूप से बीमार हुईं 67 वर्षीय पार्वतीबाई कोंडला की बुधवार रात मृत्यु हो गई। वे करीब आठ माह से बिस्तर पर थीं। उनकी सांसे तो चल रही थी, लेकिन आसपास क्या हो रहा है इसकी कोई सुध उन्हें नहीं थी।
स्वजन के अनुसार 28 दिसंबर 2025 को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद पार्वतीबाई को अस्पताल में भर्ती कराया था। 67 दिन वे अस्पताल में रहीं। मेडिक्लेम होने की वजह से उपचार का खर्चा तो दि दिया, लेकिन डिस्चार्ज होने के बाद भी उनकी चेतना पूरी तरह से नहीं लौटी।
अस्पताल से घर लौटने के बाद भी फिजियोथेरेपी, केयरटेकर और दवाओं पर प्रतिमाह 40 हजार रुपये तक खर्च हो रहा था। अंतत: बुधवार रात उनकी सांसों की डोर टूट गई।
भागीरथपुरा दूषित पानी मामले को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि मामले की फाइल महापौर के पास 66 दिन तक क्यों रुकी रही, आखिर इसकी क्या वजह थी।
उन्होंने शासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारी तय करने और प्रभावित परिवारों को राहत देने की मांग की।शुक्रवार को रेसीडेंसी कोठी में मीडिया से चर्चा में सिंघार ने कहा कि आठ महीने बाद भी दूषित पानी की समस्या खत्म नहीं हुई है।
अब तक किसी जनप्रतिनिधि की जवाबदारी तय नहीं हुई। रामकी कंपनी की भूमिका की जांच की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि शासन रिपोर्ट में जिम्मेदारी तय करने से क्यों बच रही है। मुख्यमंत्री को रिपोर्ट पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। जवाब नहीं मिला तो कांग्रेस फिर आंदोलन करेगी।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अब शासन को स्पष्ट करना चाहिए कि प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर जिनकी जिम्मेदारी बनती है, उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई की जा रही है और प्रभावित परिवारों को आयोग की सिफारिश के मुताबिक सहायता कब मिलेगी।
आयोग ने प्रभावित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता, चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति और लंबे समय तक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने समेत कई सिफारिशें की हैं। सिंघार ने आरोप लगाया कि जांच के दौरान कुछ अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने का दबाव बनाया गया।
सिंघार ने सवाल उठाया कि भागीरथपुरा मामले में महापौर पुष्यमित्र भार्गव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की जिम्मेदारी नहीं बनती है। जो जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई। सिंघार ने आरोप लगाया कि भाजपा सिर्फ इंदौर को लूटना चाहती है।
क्या महापौर और नगरीय प्रशासन मंत्री को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा नहीं दे देना चाहिए था। नगर निगम में एक रात में चार किमी सीवरेज लाइन बिछ जाती है, 100-100 करोड़ रुपये के घोटाले हो जाते हैं और कुछ नहीं हो रहा। सिंघार ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएगी।
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