
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। करीब 1232 करोड़ रुपये की लागत से तैयार और लगभग सात किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर को बने अभी एक साल ही हुआ है, लेकिन इसकी तस्वीर अब बदलने लगी है। फ्लाई ओवर के नीचे जहां खाली जगह को व्यवस्थित रखा जाना था, वहां कई जगह कब्जे नजर आ रहे हैं। कहीं वाहनों की पार्किंग के लिए बेरीकेडिंग कर दी गई है तो कहीं ठेले-टपरे लग रहे हैं। पियर पर पोस्टर और फ्लैक्स चिपके हैं। गार्डन में कचरा फैला है और शाम ढलने के बाद यहां नशा करने वालों की आवाजाही रहती है।
फ्लाईओवर के ऊपर भी स्थिति अलग नहीं है। रात में कई जगह कार और दोपहिया वाहन किनारे खड़े दिखाई देते हैं। लोगों के वाहन में बैठकर शराब पीने की शिकायतें हैं। रोशनी के लिए लगाए गए बिजली के पोल के नीचे लगे धातु के ढक्कन भी कई जगह गायब हैं। दमोहनाका रोटरी में लगी लोहे की प्लेटों में से कई उखड़ी हुई हैं। इससे सड़क पर गड्ढे और ऊबड़-खाबड़ हिस्से बन गए हैं।
दमोहनाका नगर निगम जोन कार्यालय की तरफ जाने वाली सर्विस लेन पर फ्लाई ओवर के नीचे रात में ठेले-टपरे लग जाते हैं। खाली जगह में दुकानें सजने से वाहन चालकों को निकलने के लिए कम जगह मिलती है। दमोह रोड की तरफ फ्लाई ओवर के नीचे बने गार्डन में भी लोग बैठकर खान-पान करते नजर आते हैं।
आसपास पाउच, पालीथिन और खाने-पीने का कचरा बिखरा हुआ है।दमोहनाका चौराहे के चारों तरफ भी दुकानों का सामान सड़क की ओर तक फैला हुआ है। इससे चौराहे के आसपास पहले से मौजूद यातायात के बीच जगह कम पड़ती है।
मदन महल की तरफ पेट्रोल पंप के सामने फ्लाई ओवर के नीचे का हिस्सा बड़े वाहन शोरूम की पार्किंग के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। यहां बेरीकेड लगाकर जगह घेर दी गई है। शोरूम के कर्मचारी अपने वाहन इसी हिस्से में खड़े करते हैं।
रानीताल हनुमान मंदिर की तरफ उतरने वाले लेग के नीचे भी एक मार्ट के कर्मचारियों और ग्राहकों के वाहन खड़े दिखाई देते हैं। वाहन फ्लाई ओवर के नीचे से निकलकर अचानक सड़क पर आते हैं। इसी दौरान सामने से आने वाले वाहनों से टक्कर की स्थिति बनती है।
फ्लाई ओवर के पियर भी प्रचार सामग्री से अछूते नहीं हैं। रानीताल क्षेत्र में एक दंत चिकित्सक के क्लीनिक का प्रचार करने वाला बड़ा बोर्ड पियर पर लगा है। भाजपा कार्यालय के सामने फ्लाई ओवर के नीचे फ्लैक्स लगाए गए हैं।
दमोहनाका और मदन महल चौक के आसपास भी कई पियर और आसपास के हिस्सों में पोस्टर चिपके दिखाई देते हैं। फ्लाई ओवर के जिस हिस्से से रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं, वहां जगह-जगह लगे पोस्टर और फ्लैक्स इसकी पूरी तस्वीर बदल रहे हैं।
दमोहनाका की रोटरी में फ्लाई ओवर की स्पान को जोड़ने के लिए लगाई गई लोहे की प्लेटों में से पांच-छह प्लेटें गायब हैं। कुछ जगह प्लेटें उखड़ी हुई हैं और उनके स्थान पर सड़क में गड्ढे बन गए हैं। वाहन गुजरते समय यहां तेज झटके लगते हैं।भारी वाहन गुजरने पर प्लेटों से पहले तेज आवाज आती थी।
अब कई स्थानों पर प्लेटें ही नहीं हैं। दोपहिया वाहन चालक इन हिस्सों से निकलते समय विशेष सावधानी बरतते नजर आते हैं। रात में रोशनी कम होने के कारण सड़क पर बने गड्ढे दूर से आसानी से दिखाई नहीं देते।
फ्लाई ओवर के ऊपर रोशनी के लिए लगाए गए बिजली के पोल के नीचे लगे धातु के ढक्कन भी कई जगह नहीं हैं। पोल के निचले हिस्से खुले दिखाई देते हैं। आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि धातु के ये ढक्कन चोरी कर कबाड़ में बेचे जाते हैं।
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फ्लाई ओवर के नीचे बनाए गए हरे-भरे हिस्सों में दिन में लोग बैठते हैं, लेकिन शाम के बाद यहां नशा करने वालों की आवाजाही बढ़ जाती है। कुछ स्थानों पर खाली पाउच और अन्य सामग्री भी दिखाई देती है। गार्डन की देखरेख नहीं होने से कई जगह हरियाली के बीच गंदगी जमा है।
फ्लाई ओवर शहर की बड़ी परियोजनाओं में शामिल है। करीब सात किलोमीटर लंबे इस फ्लाई ओवर के निर्माण पर 1232 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। एक साल के भीतर ही इसके नीचे और आसपास जिस तरह कब्जे, पार्किंग, पोस्टर, कचरा और चोरी की घटनाएं दिखाई दे रही हैं, उससे इसकी मौजूदा स्थिति साफ नजर आती है।
हम नगर निगम को पत्र लिख रहे हैं ताकी फ्लाई ओवर के नीचे जमे अवैध कब्जों को हटवाया जा सके। फ्लाईओवर के स्ट्रक्चर में किसी तरह का विज्ञापन नहीं किया जा सकता है इसके लिए पहले से पाबंदी है।- विनोद बरकड़े, ईई लोक निर्माण विभाग