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एमपी में लागू नहीं होगा 27% ओबीसी आरक्षण, 14% व्यवस्था ही रहेगी प्रभावी, हाई कोर्ट ने याचिका की खारिज

MP OBC Reservation: न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति विनय सराफ की विशेष युगलपीठ ने ओबीसी आरक्षण बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने की मांग वाली याचिका निरस्त ...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Fri, 09 Oct 2026 05:28:22 PM (IST)Updated Date: Fri, 09 Oct 2026 05:28:22 PM (IST)
एमपी में लागू नहीं होगा 27% ओबीसी आरक्षण, 14% व्यवस्था ही रहेगी प्रभावी, हाई कोर्ट ने याचिका की खारिज
कमलनाथ सरकार के अध्यादेश पर हाई कोर्ट का विराम।

HighLights

  1. कमलनाथ सरकार के अध्यादेश पर हाई कोर्ट का विराम
  2. 87:13 फार्मूले के तहत रुकी नियुक्तियों का रास्ता साफ
  3. जबलपुर हाई कोर्ट की विशेष युगलपीठ का बड़ा आदेश

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की कानूनी लड़ाई में हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति विनय सराफ की विशेष युगलपीठ ने ओबीसी आरक्षण बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने की मांग वाली याचिका निरस्त कर दी।

इसके साथ ही प्रदेश में ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत रखने की व्यवस्था प्रभावी रहेगी। कोर्ट ने भर्ती प्रक्रियाओं में रोके गए 13 प्रतिशत पदों पर अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को तीन महीने के भीतर नियुक्ति देने के निर्देश भी दिए हैं।


वर्ष 2019 के अध्यादेश और आरक्षण सीमा को दी गई थी चुनौती

दरअसल, वर्ष 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने अध्यादेश के जरिए ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया था। इसके बाद इस निर्णय को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में कई याचिकाएं दायर हुईं।

विवाद का प्रमुख आधार आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा और ओबीसी वर्ग को अतिरिक्त आरक्षण देने के लिए पर्याप्त आंकड़ों की उपलब्धता रहा। कानूनी विवाद के कारण अनेक सरकारी भर्तियों में चयन और नियुक्तियों का एक हिस्सा लंबित था।

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87:13 व्यवस्था पर भी पड़ेगा असर

आरक्षण विवाद के चलते प्रदेश में 87:13 के फार्मूले के तहत भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही थी। इसमें 87 प्रतिशत पदों पर निर्धारित व्यवस्था के अनुसार चयन और नियुक्तियां की जा रही थीं, जबकि शेष 13 प्रतिशत पदों को विवाद के अंतिम निर्णय तक रोका गया था।

अब अदालत के निर्देश से इन लंबित पदों पर नियुक्ति का रास्ता खुलेगा। बहरहाल, इस फैसले का असर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन मंडल और अन्य भर्ती एजेंसियों की लंबित चयन प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है। हालांकि, अलग-अलग भर्तियों में नियुक्तियों का क्रियान्वयन संबंधित आदेशों और चयन प्रक्रिया की स्थिति के अनुसार होगा।