
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पाठ्यक्रम से बाहर के प्रश्नपत्र, परिणामों में गड़बड़ी और मूल्यांकन को लेकर उठते सवालों के बाद अब गलत परीक्षा परिणाम जारी करने और उन्हीं परिणामों के आधार पर अगले सेमेस्टर के परीक्षा फार्म भरवाने का मामला सामने आया है।
विश्वविद्यालय ने पीजी प्रथम सेमेस्टर के परिणाम जारी किए, छात्रों ने उन्हें आधिकारिक मानकर द्वितीय सेमेस्टर के फार्म भरे और पांच अक्टूबर को संबंधित 16 पाठ्यक्रमों के परिणाम पोर्टल से हटा दिए गए। इसके बावजूद उसी दिन संशोधित अधिसूचना जारी कर अगले सेमेस्टर के परीक्षा आवेदन की समय सीमा बढ़ा दी गई।
विश्वविद्यालय ने एमए, एमएससी, एमकाम, एमएसडब्ल्यू सहित करीब 16 स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के प्रथम सेमेस्टर के परिणाम 20 अगस्त से 26 सितंबर के बीच जारी किए थे। इसके बाद 29 सितंबर से द्वितीय सेमेस्टर के परीक्षा फार्म भरने की प्रक्रिया शुरू हुई। छात्र वेबसाइट पर उपलब्ध परिणाम को आधिकारिक मानकर फार्म भरते रहे। पांच अक्टूबर को संबंधित परिणाम वेबसाइट से हटा दिए गए।
इसके बाद भी परीक्षा आवेदन की प्रक्रिया बंद नहीं की गई। बल्कि संशोधित कार्यक्रम के अनुसार आठ अक्टूबर तक नियमित शुल्क और 10 अक्टूबर तक विलंब शुल्क के साथ फार्म भरने की सुविधा जारी रखी गई।
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल है। जब विश्वविद्यालय को प्रथम सेमेस्टर के परिणामों में गड़बड़ी का पता चल चुका था और 16 पाठ्यक्रमों के परिणाम पोर्टल से हटा दिए गए थे, तो अगले सेमेस्टर के परीक्षा आवेदन की प्रक्रिया रोकने के बजाय उसकी समयसीमा क्यों बढ़ाई गई।
अब यदि संशोधित परिणाम में उनकी उत्तीर्ण-अनुत्तीर्ण स्थिति बदलती है तो उनके पहले से भरे परीक्षा फार्म और अगले सेमेस्टर में उनकी पात्रता का क्या होगा। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध आधिकारिक परिणाम के आधार पर की गई प्रक्रिया का खामियाजा उन्हें नहीं भुगतना चाहिए।
यह भी पढ़ें- जबलपुर में RDVV के कुलसचिव निलंबित चौकीदार से भयभीत, कुलगुरु को फिर लिखा पत्र; मांग रहे सुरक्षा