
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने जबलपुर में सामने आए 43.03 करोड़ रुपये के कथित धान परिवहन घोटाले के बाद प्रदेश के 28 जिलों में हुई जांच की रिपोर्ट पेश करने के लिए राज्य सरकार को छह सप्ताह का समय दिया है।
मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने निर्देश दिया कि सरकार जांच रिपोर्ट की एक प्रति याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को भी उपलब्ध कराए, ताकि रिपोर्ट का अध्ययन कर उस पर अपना पक्ष रखा जा सके। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि धान के परिवहन और आपूर्ति की निगरानी के लिए जीपीएस संबंधी स्पष्ट व्यवस्था होने के बावजूद उसका प्रभावी पालन नहीं किया गया। जबलपुर में कलेक्टर की कार्रवाई के दौरान 43.03 करोड़ रुपये के कथित धान परिवहन घोटाले का खुलासा हुआ था। मामले में एफआइआर दर्ज होने के साथ कई आरोपितों की गिरफ्तारी भी हुई।
याचिका कर्ताओं का कहना है कि धान परिवहन में सामने आई अनियमितताएं केवल जबलपुर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों में भी ऐसी गड़बड़ियां होने की आशंका है। इसी आधार पर प्रदेशभर में जांच सीबीआई या सीआईडी से कराने की मांग की गई है।
हाई कोर्ट ने 14 अगस्त को सभी जिलों के कलेक्टरों से जांच रिपोर्ट मांगी थी। सुनवाई के दौरान सरकार ने विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए छह सप्ताह का समय मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय, शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता नीलेश यादव, ईओडब्ल्यू की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे और नागरिक आपूर्ति निगम की ओर से अधिवक्ता विवेक रंजन पांडे उपस्थित रहे। हाई कोर्ट अब जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा।
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