
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जबलपुर से मंडला होते हुए चिल्पी तक जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन में बदलने की तैयारी के बीच सड़क के एक महत्वपूर्ण हिस्से का स्वामित्व और रखरखाव जल्द राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के पास पहुंचने वाला है।
नागाघाटी-डोबी से मंडला सीमा तक करीब 63 किलोमीटर सड़क फिलहाल मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) के पास है। इसके रखरखाव और जीर्णोद्धार का काम भी एमपीआरडीसी के माध्यम से कराया गया है। अब इस हिस्से को एनएचएआई को सौंपने की प्रक्रिया अंतिम चरण में बताई जा रही है।
सड़क एनएचएआई को हस्तांतरित होने के बाद इस मार्ग पर टोल व्यवस्था लागू किए जाने की तैयारी है। इसका उद्देश्य सड़क के संचालन और रखरखाव पर होने वाले खर्च की व्यवस्था करना है। हालांकि टोल प्लाजा का स्थान और वसूली शुरू होने की तारीख सहित अंतिम निर्णय एनएचएआई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
जबलपुर से मंडला-चिल्पी तक पुराने मार्ग की लंबाई करीब 176 किलोमीटर बताई जाती रही है। जबलपुर रिंग रोड के निर्माण के बाद बरेला तक का हिस्सा नए कारिडोर के दायरे में आ गया है। इससे पुराने हाईवे का करीब 26 किलोमीटर हिस्सा अलग हो गया है।
अब नागाघाटी-डोबी क्षेत्र से मंडला की ओर जाने वाले हिस्से को इस कारिडोर का प्रमुख शुरुआती बिंदु माना जा रहा है। वर्तमान व्यवस्था में नागाघाटी से मंडला सीमा तक करीब 63 किलोमीटर हिस्सा एमपीआरडीसी के पास है, जबकि मंडला से चिल्पी तक करीब 87 किलोमीटर मार्ग एनएचएआई के अधीन है। ऐसे में हस्तांतरण के बाद जबलपुर से मंडला की ओर जाने वाले मार्ग का बड़ा हिस्सा एक ही केंद्रीय एजेंसी के अधीन आ जाएगा।
जबलपुर से मंडला और चिल्पी तक मौजूदा सड़क को फोरलेन में विकसित करने की योजना पर भी काम चल रहा है। केंद्र सरकार ने मई 2026 में जबलपुर-चिल्पी एनएच-30 के करीब 160 किलोमीटर लंबे हिस्से को दो लेन से आधुनिक चार लेन कारिडोर में विकसित करने की डीपीआर प्रक्रिया प्रगति पर होने की जानकारी दी थी।
परियोजना में सुरक्षित यात्रा, बेहतर कनेक्टिविटी, वन्यजीव संरक्षण और आधुनिक इंजीनियरिंग से जुड़े प्रविधानों पर भी जोर दिया गया है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब चार हजार करोड़ रुपये बताई गई है। हालांकि परियोजना की अंतिम लागत प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतियों और डीपीआर में तय होने वाले कार्यों के आधार पर निर्धारित होगी।
जबलपुर-मंडला-चिल्पी मार्ग के पुराने परियोजना दस्तावेजों में भी इस कारिडोर के लिए टोल प्लाजा का प्रावधान दर्ज रहा है। 2014 के परियोजना रिकार्ड में करीब 177.75 किलोमीटर लंबे मार्ग के लिए तीन टोल प्लाजा प्रस्तावित किए गए थे।
अब सड़क के एमपीआरडीसी से एनएचएआई को हस्तांतरण और प्रस्तावित फोरलेन परियोजना के आगे बढ़ने के साथ इस मार्ग पर टोल व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में है। फिलहाल सबसे पहले 63 किलोमीटर हिस्से के हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होना है। इसके बाद एनएचएआइ सड़क के रखरखाव, टोल व्यवस्था और आगामी फोरलेन परियोजना से संबंधित अगली प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा।