
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मानसून ने प्रदेश के ताप विद्युत गृहों के लिए कोयले की उपलब्धता और आपूर्ति प्रभावित की है। कोयला खदानों में पानी भरने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है। कोयला गीला होने के कारण रेलवे रैक से उसकी अनलोडिंग में भी सामान्य से चार गुना तक अधिक समय लग रहा है। इसका सीधा असर पावर प्लांटों तक कोयले की आपूर्ति पर पड़ रहा है।
सबसे चिंताजनक स्थिति खंडवा ताप विद्युत गृह की है। यहां करीब 90 हजार टन कोयला ही उपलब्ध है, जबकि प्रतिदिन करीब 25 हजार टन की खपत हो रही है। इस हिसाब से प्लांट के पास महज तीन से चार दिन का स्टाक बचा है। सामान्य परिस्थितियों में पावर प्लांट पहुंचने के बाद एक कोयला रैक को खाली करने में करीब चार से पांच घंटे लगते हैं।
वर्तमान में यही प्रक्रिया 10 से 20 घंटे तक खिंच रही है। इससे रैक का टर्नअराउंड टाइम बढ़ गया है। खदानों में बारिश का पानी भरने से कोयला निकालने में भी दिक्कत आ रही है। इसके अलावा खदान से निकलने वाले कोयले के साथ कई बार मिट्टी भी अधिक मात्रा में आ रही है। कैलोरिफिक वैल्यू कम होने के चलते बिजली उत्पादन के लिए अपेक्षाकृत अधिक कोयले की जरूरत पड़ सकती है।
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कोयले की उपलब्धता और आपूर्ति की स्थिति पर फ्यूल मैनेजमेंट विभाग लगातार निगरानी कर रहा है। केंद्रीय स्तर पर गठित समिति भी प्रतिदिन स्थिति की समीक्षा कर रही है। बारिश के कारण खदान से लेकर रेलवे रैक और फिर पावर प्लांट तक पूरी सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है।