
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। अदालत के आदेश पर कोर्ट के नाजिर के साथ अधिवक्ता कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। भुगतान की समयसीमा को लेकर अधिकारियों और अधिवक्ताओं के बीच बातचीत हुई।
प्रशासन ने पहले 15 कार्य दिवस में भुगतान का लिखित आश्वासन देने की कोशिश की, लेकिन अधिवक्ताओं ने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि 15 दिन और 15 कार्य दिवस अलग-अलग हैं। अंततः प्रशासन ने 15 दिन में भुगतान का लिखित भरोसा दिया, जिसके बाद कुर्की की कार्रवाई रोक दी गई।
कलेक्ट्रेट में अपर कलेक्टर शैलेंद्र सिंह और एसडीएम पंकज मिश्रा और आरएस मरावी अधिवक्ताओं को मनाने में जुटे रहे। लिखित आश्वासन में 15 कार्य दिवस दर्ज किए जाने पर अधिवक्ताओं ने दीपावली की छुट्टियों का हवाला देते हुए सवाल उठाए।
कोर्ट के नाजिर ने कहा कि प्रशासनिक दबाव में कार्रवाई रोकी गई तो इसकी जानकारी अदालत को दी जाएगी। अधिवक्ताओं ने कलेक्टर को आवंटित सरकारी वाहन की चाबी लेने और कलेक्टर न्यायालय के सामान की सूची बनाने की तैयारी भी की थी। कार्यालय में ताला लगाने की स्थिति बनने पर प्रशासन ने लिखित आश्वासन में संशोधन किया और कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
यह मामला 7 अक्टूबर 2019 को कुंडम में हुए सड़क हादसे का है। एसडीएम कार्यालय की बोलेरो की टक्कर से नवाब खान की मौत हो गई थी। उनकी पत्नी नूरजहां, बेटे शब्बीर और बेटी मुस्कान ने मुआवजे के लिए अदालत में दावा किया था।
तीसवें अपर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने 25 फरवरी 2025 को परिवार को 12 लाख 93 हजार रुपये मुआवजा और आवेदन की तारीख से सात प्रतिशत सालाना ब्याज देने का आदेश दिया था। भुगतान नहीं होने पर ब्याज और खर्च सहित बकाया राशि 18 लाख तीन हजार 262 रुपये हो गई।
अदालत ने कलेक्टर कार्यालय की चल-अचल संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया। आदेश के पालन के लिए अधिवक्ता सीपी सिंह, प्रमोद विश्वकर्मा और आत्माराम लखेरा कोर्ट के नाजिर के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। हालांकि बातचीत के बाद कुर्की फिलहाल टल गई है।
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