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अदालत से दोषमुक्त, फिर भी पुलिस कांस्टेबल की नियुक्ति रोकी, हाई कोर्ट ने पद रिक्त रखने के दिए निर्देश

दोषमुक्त हो चुके अभ्यर्थी को पुराने आपराधिक मामले के आधार पर पुलिस कांस्टेबल नियुक्ति से वंचित किया गया। हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत देकर पद रिक्त रखने क...और पढ़ें

By sabbir news agencyEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Wed, 23 Sep 2026 03:16:15 PM (IST)Updated Date: Wed, 23 Sep 2026 03:16:15 PM (IST)
अदालत से दोषमुक्त, फिर भी पुलिस कांस्टेबल की नियुक्ति रोकी, हाई कोर्ट ने पद रिक्त रखने के दिए निर्देश
अदालत से दोषमुक्त पुलिस कांस्टेबल की भर्ती रोकी। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. अभ्यर्थी ने पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की।
  2. दस्तावेज सत्यापन के बाद स्क्रीनिंग कमेटी ने अभ्यर्थित्व निरस्त किया।
  3. पूर्व आपराधिक मामले के आधार पर नियुक्ति से इनकार।

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर : आपराधिक प्रकरण में ट्रायल कोर्ट से दोषमुक्त हो चुके अभ्यर्थी को पूर्व में दर्ज मामले के आधार पर पुलिस कांस्टेबल पद पर नियुक्ति से वंचित करने के मामले में हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत प्रदान की है। कोर्ट ने संबंधित पद को याचिका के अंतिम निर्णय तक रिक्त रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

स्क्रीनिंग कमेटी ने निरस्त किया अभ्यर्थित्व

याचिकाकर्ता छतरपुर निवासी अशोक अहीरवार की ओर से अधिवक्ता आकाश सिंघई ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता ने पुलिस कांस्टेबल भर्ती के लिए आवेदन किया था। निर्धारित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उसके दस्तावेजों का सत्यापन भी किया गया। हालांकि, स्क्रीनिंग कमेटी ने उसके विरुद्ध पूर्व में दर्ज आपराधिक प्रकरण का हवाला देते हुए अभ्यर्थित्व निरस्त कर दिया।


दोषमुक्त होने के बावजूद नियुक्ति से इनकार

  • उक्त मामले में एक महिला ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म किए जाने के आरोप लगाए थे। संबंधित आपराधिक प्रकरण में सक्षम न्यायालय ने उसे दोषमुक्त कर दिया है।
  • अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। इसके बावजूद विभाग ने पुलिस सेवा के लिए अपेक्षित चरित्र एवं आचरण और मोरल कंडक्ट का हवाला देकर नियुक्ति से वंचित कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का दिया हवाला

अधिवक्ता ने तर्क दिया कि केवल आपराधिक प्रकरण दर्ज होना नियुक्ति से इनकार का स्वतः आधार नहीं हो सकता। विशेषकर तब, जब अभ्यर्थी को आपराधिक न्यायालय से दोषमुक्त किया जा चुका हो। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उन निर्णयों का हवाला दिया, जिनमें दोषमुक्ति के स्वरूप, आरोपों की प्रकृति और मामले के वास्तविक तथ्यों को नियुक्ति के प्रश्न पर महत्वपूर्ण माना गया है।

पद रिक्त रखने का निर्देश, जवाब तलब

प्रस्तुत तर्कों पर विचार के बाद हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए संबंधित पद को याचिका के अंतिम निर्णय तक रिक्त रखने का निर्देश दिया। विभाग को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है। अगली सुनवाई में विभाग का जवाब और नियुक्ति से संबंधित रिकार्ड सामने आने के बाद मामले के अन्य पहलुओं पर विचार किया जाएगा।

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