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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 22, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जबलपुर में झोलाछाप डॉक्टर पर एक्शन, अवैध क्लीनिक पर मारा छापा, FIR दर्ज

आरोपित के पास वैध डिग्री नहीं होने के बावजूद वह मरीजों को ऐलोपैथी दवा दे रहा था। छापमारी में आरोपित की क्लीनिक से अनूसूची एच, एच और एक्स की 46, 536 और...और पढ़ें

By Deepankar RoyEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Fri, 22 Aug 2025 03:12:02 PM (IST)Updated Date: Fri, 22 Aug 2025 03:12:02 PM (IST)
जबलपुर में झोलाछाप डॉक्टर पर एक्शन, अवैध क्लीनिक पर मारा छापा, FIR दर्ज
Jabalpur: झोलाछाप डॉक्टर पर एक्शन। (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. अवैध क्लीनिक चलाने वाले झोलाछाप पर FIR
  2. दुर्गा नगर में गरूड़ दल ने मई में मारा था छापा
  3. लंबे समय से बिना डिग्री के कर रहा था उपचार

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। दुर्गा नगर में अवैध क्लीनिक संचालित करने वाले महेंद्र पांडे पर एफआईआर पंजीबद्ध की गई है। आरोपित महेंद्र पांडे बिना पंजीयन के अपना दवाखाना चला रहा था। उसके बाद ऐलोपैथी दवा देने की डिग्री नहीं थी। फिर भी वह मरीजों को ऐलोपथी दवा लिख रहा था।

जिले में समस्त विभागों के संयुक्त गरुड़ दल ने 19 मई को महेंद्र पांडे के क्लीनिक पर छापा मारा था। कोई भी चिकित्सकीय डिग्री और पंजीयन नहीं दिखा पाने पर क्लीनिक को सील कर दिया गया था। मामले की जांच के बाद गुरुवार को प्रशासन ने आरोपित महेंद्र पांडे के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई है।


मरीजों की जान के साथ रहा था खिलवाड़

आरोपित के पास वैध डिग्री नहीं होने के बावजूद वह मरीजों को ऐलोपैथी दवा दे रहा था। छापमारी में आरोपित की क्लीनिक से अनूसूची एच, एच और एक्स की 46, 536 और 16 दवाएं जब्त की गई थी। इन दवाओं के मरीजों को सेवन के परामर्श का अधिकार पंजीकृत चिकित्सक को ही होता है।

अयोग्य व्यक्ति के दवा देने पर मरीज की जान तक जा सकती है। छापेमारी में जब्त किए गए लेटरहेड में महेंद्र पांडे ने कई डिग्रियां लिख रही थी। उसे मूल डिग्रियां प्रस्तुत करने का समय दिया गया था, लेकिन जब वह अपना और क्लीनिक का पंजीयन प्रस्तुत नहीं कर सका।

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पहले भी कार्रवाई हुई थी, फिर करने लगा था उपचार

पुलिस को आरंभिक जांच में पता चला है कि महेंद्र पांडे लंबे समय से बिना डिग्री मरीजों का उपचार कर रहा था। लगभग तीन वर्ष पूर्व भी स्वास्थ्य विभाग के दल ने उसकी क्लीनिक पर छापा मारा था। उसे बंद कराया था। लेकिन कुछ समय बाद फिर से उसने अपनी प्रेक्टिस शुरू कर दिया। बिना किसी वैध अनुमति के मरीजों का ऐलोपैथी से उपचार करने लगा।