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पीजी मेडिकल में इन-सर्विस अभ्यर्थियों को 30 प्रतिशत से अधिक सीट आवंटन को चुनौती, हाई कोर्ट ने सरकार से दो दिन में मांगा जवाब

पीजी मेडिकल काउंसलिंग की प्रथम चरण की मेरिट सूची में 30 प्रतिशत से अधिक इन-सर्विस अभ्यर्थियों को शामिल करने के मामले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है।

By Surendra DubeyEdited By: manoj dubey
Publish Date: Mon, 02 Nov 2026 09:27:51 PM (IST)Updated Date: Mon, 02 Nov 2026 09:27:51 PM (IST)
पीजी मेडिकल में इन-सर्विस अभ्यर्थियों को 30 प्रतिशत से अधिक सीट आवंटन को चुनौती, हाई कोर्ट ने सरकार से दो दिन में मांगा जवाब

HighLights

  1. प्रथम चरण की काउंसलिंग 10 नवंबर तक निर्धारित है
  2. बड़ी संख्या में इन-सर्विस अभ्यर्थियों को जगह दी गई
  3. 30 प्रतिशत आरक्षित सीटों के दायरे में ही प्रवेश दिया जाए

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। पीजी मेडिकल काउंसलिंग की प्रथम चरण की मेरिट सूची में 30 प्रतिशत से अधिक इन-सर्विस अभ्यर्थियों को शामिल करने के मामले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप है कि इन-सर्विस अभ्यर्थियों को ओपन कैटेगरी में भी प्रवेश का लाभ दिया जा रहा है।

मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विशाल जैन की युगलपीठ ने राज्य सरकार एवं संचालक चिकित्सा शिक्षा (डीएमई) को नोटिस जारी कर दो दिन में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई पांच नवंबर को होगी।

प्रथम चरण की काउंसलिंग 10 नवंबर तक निर्धारित है

भोपाल निवासी डॉ. जे बतरा और डॉ. एस सिंह की याचिका के अनुसार, डीएमई ने काउंसलिंग के प्रथम चरण की मेरिट सूची जारी कर दी है। अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन जारी है और प्रथम चरण की काउंसलिंग 10 नवंबर तक निर्धारित है।


बड़ी संख्या में इन-सर्विस अभ्यर्थियों को जगह दी गई

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सूची में बड़ी संख्या में इन-सर्विस अभ्यर्थियों को जगह दी गई और उन्हें पसंदीदा विभाग भी आवंटित किए गए, जबकि इस श्रेणी के लिए केवल 30 प्रतिशत सीटों का प्रविधान है। उनका आरोप है कि इन-सर्विस श्रेणी में परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों को ओपन कैटेगरी में भी शामिल किया गया।

30 प्रतिशत आरक्षित सीटों के दायरे में ही प्रवेश दिया जाए

अधिवक्ता आदित्य संघी ने दलील दी कि इन-सर्विस श्रेणी में परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों को ओपन कैटेगरी का अभ्यर्थी नहीं माना जा सकता। युगलपीठ ने निर्देश दिया कि उन्हें 30 प्रतिशत आरक्षित सीटों के दायरे में ही प्रवेश दिया जाए।

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