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माखनलाल विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर नियुक्ति को चुनौती, सात को नोटिस

आरोप है कि जुलाई 2014 में नियुक्ति के समय डाॅ. शशिकला इन शर्तों को पूरा नहीं करती थीं। मामले में कहा गया कि डाॅ. शशिकला के पास 1996 की एमएससी कंप्यूटर...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Fri, 18 Sep 2026 07:42:18 PM (IST)Updated Date: Fri, 18 Sep 2026 07:42:18 PM (IST)
माखनलाल विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर नियुक्ति को चुनौती, सात को नोटिस
इन आरोपों पर प्रतिवादियों का पक्ष और नियुक्ति की वैधता पर अंतिम निर्णय अभी होना शेष है!

HighLights

  1. डाॅ. पी. शशिकला की नियुक्ति पर सवाल
  2. प्रोफेसर पद पर पदोन्नति को भी दी चुनौती
  3. 2014 में हुई नियुक्ति को हाई कोर्ट में चुनौती

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल की वर्तमान रजिस्ट्रार एवं प्रोफेसर डाॅ. पी. शशिकला की वर्ष 2014 में न्यू मीडिया टेक्नोलाॅजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर पद पर हुई नियुक्ति को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है।

डाॅ. शशिकला समेत सात प्रतिवादियों को नोटिस

कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए डाॅ. शशिकला समेत सात प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं। डा. आशुतोष मिश्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता केसी घिडियाल और अधिवक्ता संपत कुमार कुशवाहा ने दायर की है।

मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री जैसी योग्यताएं निर्धारित थीं

मार्च 2012 में जारी विज्ञापन में एसोसिएट प्रोफेसर पद के लिए पीएचडी, आठ वर्ष का शिक्षण अनुभव, निर्धारित एपीआई स्कोर व कंप्यूटर एप्लीकेशन अथवा मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री जैसी योग्यताएं निर्धारित थीं।

निर्धारित योग्यता पूरी होने पर सवाल उठाया

आरोप है कि जुलाई 2014 में नियुक्ति के समय डाॅ. शशिकला इन शर्तों को पूरा नहीं करती थीं। मामले में कहा गया कि डाॅ. शशिकला के पास 1996 की एमएससी कंप्यूटर साइंस व 2010 की पीएचडी है, लेकिन एमसीए की डिग्री नहीं है। इसी आधार पर विज्ञापन में निर्धारित योग्यता पूरी होने पर सवाल उठाया गया है।


2016 में प्रोफेसर पद पर पदोन्नति को भी चुनौती दी

पीएचडी के दौरान नियमित सेवा में रहने और अवकाश संबंधी नियमों के पालन पर भी आपत्ति उठाई गई है। इसके अलावा जुलाई 2014 में एसोसिएट प्रोफेसर नियुक्ति के बाद नवंबर 2016 में प्रोफेसर पद पर पदोन्नति को भी चुनौती दी गई है।

स्कीम के तहत तीन वर्ष का अनुभव आवश्यक था

दावा है कि करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत तीन वर्ष का अनुभव आवश्यक था, जबकि पदोन्नति इससे पहले कर दी गई। मामले में राज्य सरकार, उच्च शिक्षा व जनसंपर्क विभाग, पूर्व कुलपति बीके कुठियाला व डा. सीपी अग्रवाल सहित सात प्रतिवादियों को पक्षकार बनाया गया है। इन आरोपों पर प्रतिवादियों का पक्ष और नियुक्ति की वैधता पर अंतिम निर्णय अभी होना शेष है।

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