जबलपुर में एक्यूआई पहुंचा 250 के पार, शहर में उड़ रहे धूल के गुबार से लोग परेशान
जबलपुर शहर में वायु प्रदूषण का स्तर मापने चार स्थानों पर रियल टाइम मॉनिटर लगाए गए हैं। इसमें दर्ज आंकड़ों पर गौर करें तो अलग स्थानों पर वायु गुणवत्ता ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 11 Jan 2026 10:14:55 AM (IST)Updated Date: Sun, 11 Jan 2026 10:19:39 AM (IST)
जबलपुर के रामपुर आदर्श नगर में पाइपलाइन बिछाने के कार्य के चलते सड़क पर उड़ती धूल परेशानी का कारण बन रही है।HighLights
- अनियोजित निर्माण कार्य से शहर की सड़कों पर उड़ रही है धूल
- रात में जलते अलाव और पुराने वाहनों का धुआं बड़ा कारण
- शहर में प्रदूषण बढ़ने श्वास के मरीजों की परेशानी हो रही है
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। पेयजल की शुद्धता, गुणवत्ता बनाए रखने की चुनौती के बीच शहर की वायु गुणवत्ता बेहतर बनाए रखने की भी चुनौती बढ़ गई है। शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 250 के पार पहुंच गया है, जो न सिर्फ पर्यावरण बल्कि लोगों की सेहत के लिए भी घातक है। इसका कारण शहर में अनियोजित तरीके से हो रहे निर्माण कार्य, सड़कों की खोदाई और ठंड से बचने के लिए अलाव जलाने की छूट माना जा रहा है।
पुराने वाहन भी बड़ा कारण हैं जो जहरीला धुआं छोड़ रहे हैं। शहर के वायु प्रदूषण का स्तर मापने चार स्थानों पर रियल टाइम मॉनिटर लगाए गए हैं। इसमें दर्ज आंकड़ों पर गौर करें तो अलग स्थानों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक 233 से 291 तक दर्ज किया जा रहा है। मप्र प्रदूषण बोर्ड के विज्ञानियों की नजर में यह आंकड़े चौंकाने वाले हैं, जो सेहत के लिए भी खराब हैं। इससे श्वास के मरीजों की परेशानी बढ़ रही है। सरकारी व निजी अस्पतालों में श्वास रोगियों की संख्या बढ़ने लगी है।
स्वच्छ हवा के लिए दो बार मिल चुका पुरस्कार
विदित हो कि जबलपुर नगर निगम को, 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहर की श्रेणी में हवा को स्वच्छ व बेहतर रखने के लिए दो बार राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार मिल चुका है। ऐसे में हवा को साफ बनाए रखने की नगर निगम की चुनौती बढ़ गई है।
इसलिए हवा हो रही खराब
- अमृत योजना 2.0 के तहत गौरीघाट ललपुर से रांझी तक बिछाई जा रही पानी की राइजिंग मेनलाइन के लिए अलग-अलग स्थानों पर सड़कों की खोदाई किए जाने से ललपुर, गणेश मंदिर, रामपुर, कांचघर, चुंगीचौकी, रांझी सहित अन्य निर्माण स्थलों पर धूल-मिट्टी के गुबार उठ रहे हैं। इसे कवर करने ग्रीन नेट का उपयोग नहीं हो रहा है।
नगर निगम ने सार्वजनिक स्थलों पर अलाव जलाने पर पहले प्रतिबंध लगाए, बाद में इसे शिथिल करते हुए अलाव जलवाना शुरू कर दिया है। अंतराज्यीय बस टर्मिनल, मालगोदाम चौक रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म छह के बाहर, मदनमहल रेलवे स्टेशन के बाहर, एल्गिन, विक्टोरिया, मेडिकल अस्पताल सहित चिंहित किए गए 23 सार्वजनिक स्थानों पर निगम अलाव जलवा रहा है। लकड़ी का धुआं वायु गुणवत्ता सूचकांक का स्तर बढ़ा रहा है।
जबलपुर में चलने वाले लगभग 17-20 प्रतिशत वाहन तय मानकों से अधिक धुआं छोड़ रहे हैं। 20 से 30 साल पुराने 'अनफिट' वाहन और बिना फिटनेस वाले कमर्शियल वाहन वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं। इनमें नगर निगम के कंडम हो चुके करीब 100 वाहन भी शामिल हैं, जो सड़कों पर दौड़ रहे हैं। ऐसे समझें स्वास्थ्य के लिए घातक है हवा में घुला प्रदूषण
- हवा में धूल के बारीक कण यानी पीएम-10 (पार्टिकुलेट मैटर) की मात्रा 210 तक पहुंच गई है जबकि सामान्य स्थिति में इसे 100 के भीतर होना होना चाहिए। इसके अलावा पीएम-2.5 की मात्रा अधिकतम 60 होनी चाहिए जो 107 तक पहुंच गई है।
- पीएम-10 अैर पीएम-2 हवा में तैरते वे बारीक कण हैं जिन्हें देख पाना संभव नहीं है। हवा में घुले ये जहरीले कण स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक हैं।
- अनेक गैसों के मिश्रण से शुद्ध वायु का अनुपात तय होता है। इसमें नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइआक्साइड, निष्क्रिय गैस, धूल के कण व जल वाष्प आदि समाहित रहते हैं। धूल के गुबार भी प्रदूषण में बढ़ोतरी का मुख्य कारण बनते हैं।
आंकड़ों में प्रदूषण का स्तर
- स्थान-वायु गुणवत्ता सूचकांक
- गुप्तेश्वर - 233
- मढ़ाताल - 260
- सुहागी - 291
- गोविंदभवन - 88
वायु गुणवत्ता सूचकांक को ऐसे समझें
- 0- 50 - अच्छा- वायु की गुणवत्ता संतोषजनक है तथा वायु प्रदूषण से कोई खतरा नहीं है
- 51- 100 - मध्यम- वायु की गुणवत्ता स्वीकार्य है। कुछ लोगों के लिए जोखिम हो सकता है
- 101- 150 -अस्वस्थ्यकर - संवेदनशील लोगों को स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभाव हो सकते हैं, आमजन पर असर कम
- 151- 200 - बीमार- आमजनता को स्वास्थ्य संबंधी प्रभाव का अनुभव हो सकता है
- 201 से 300- बहुत खराब- सभी को बाहरी गतिविधियों को कम करना चाहिए, विशेष रूप से संवेदनशील समूहों को
- 301 ये 400- गंभीर- सभी को बाहरी गतिविधियों से बचना चाहिए।
श्वास के मरीजों को अटैक का खतरा
प्रदूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म कण फेफड़ों में सूजन, वायुमार्गों में संकुचन पैदा करते हैं। जिससे लगातार खांसी, घरघराहट, सांस फूलना और सीने में जकड़न होती है, जो अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों को बढ़ाता है। साथ ही लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क से फेफड़ों की क्षमता घटती है। प्रदूषण का स्तर बढ़ने से श्वास के मरीजों के लिए अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है और स्थिति गंभीर हो जाती है। अत: सावधानी जरूरी है। नियमित जांच और बाहर निकलते समय कोशिश करें मास्क का उपयोग करें। - डॉ. विकास पटेल, श्वास रोग विशेषज्ञ
डीप फोगर मशीन प्रमुख मार्गों पर चलवा रहे हैं
शहर को प्रदूषण मुक्त करने की दिशा में हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। सर्द मौसम में वायु गुणवत्ता सूचनांक बढ़ जाता है। इसे नियंत्रित करने के लिए डीप फोगर मशीन प्रमुख मार्गों पर चलवा रहे हैं। रोजाना सड़क, फुटपाथ, चौराहों की जेट प्रेशर से धुलाई कराई जा रही है। निर्माण स्थलों पर ग्रीन नेट का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। - संभव अयाची, नोडल अधिकारी, स्वच्छता सेल, नगर निगम