
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। आयुष्मान भारत निरामयम योजना में सरकारी राशि हड़पने के मामलों की जांच जबलपुर में तेज हो गई है। डिंडौरी में 14 ग्रामीणों को जबलपुर के निजी अस्पताल ले जाते समय पकड़े जाने के मामले के बाद राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम (टीएमएस) के डेस्कटाप ऑडिट में 20 निजी अस्पतालों के करीब 12 करोड़ रुपये के संदिग्ध क्लेम चिह्नित किए हैं।
प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि कुछ अस्पतालों ने मृत मरीजों के नाम पर भी इलाज दिखाकर क्लेम लिया और बिना जरूरत मरीजों को आईसीयू में भर्ती दिखाया गया।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जल्द ही जबलपुर के सभी आयुष्मान पंजीकृत अस्पतालों के पिछले एक साल के क्लेम की थर्ड पार्टी आडिट कराई जाएगी और दोषी अस्पतालों को हमेशा के लिए पैनल से हटाया जाएगा। महत्वपूर्ण है कि विगत में आयुष्मान के भोपाल स्थित कार्यालय ने जबलपुर के साथ निजी अस्पतालों को इस योजना की सूची से नाम हटा दिया था। अब गड़बड़ी करने वाले अन्य निजी अस्पतालों पर नजर है।
जबलपुर सीएमएचओ कार्यालय के अनुसार अब विभाग ने तीन स्तर पर शिकंजा कसना शुरू किया है। पहला है टीएमएस अलर्ट सिस्टम, इसके तहत आयुष्मान पोर्टल पर प्रत्येक 100 बिल में चार संदिग्ध क्लेम सामान्य माने जाते हैं, लेकिन इससे ज्यादा अलर्ट पर आटो ऑडिट शुरू हो जाता है। इसी के तहत 71 अस्पताल लाल घेरे में आए।
दूसरा तरीका है औचक निरीक्षण और बायोमैट्रिक सत्यापन। इसके तहत अस्पताल में भर्ती हर मरीज की बायोमैट्रिक उपस्थिति और फोटो अनिवार्य की जा रही है।
जिला स्तर पर औचक निरीक्षण दल बनाए गए हैं। इसके अलावा प्रशासन दलाल नेटवर्क पर भी कार्रवाई कर रहा है। इसके तहत आदिवासी क्षेत्रों से मरीज लाने वाले एजेंटों और बिचौलियों पर एफआईआर और अस्पतालों का लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई चल रही है।
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