
नईदुनिया प्रतिनिधि जबलपुर। महाबलीपुरम की कृष्णा बटर बाॅल को संरक्षण देने वाले पुरातत्व विभाग का जबलपुर के बैलेंसिंग राॅक को लेकर अलग रुख क्यों है? नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने इस दोहरे मापदंड पर सवाल उठाते हुए प्राकृतिक धरोहर की उपेक्षा के खिलाफ विरोध जताया है।
मंच का आरोप है कि मदन महल किले से महज 400 मीटर दूर स्थित बैलेंसिंग राॅक की सुरक्षा को लेकर न तो पर्यटन विभाग गंभीर है और न ही संबंधित विभाग जिम्मेदारी लेने को तैयार है।
मंच का कहना है कि विशाल गोलाकार चट्टान दूसरी चट्टान पर संतुलित अवस्था में टिकी है। दावा है कि वर्ष 1935 और 1997 के भूकंप के झटकों के बावजूद यह अपनी जगह कायम रही। हालांकि, इसकी करीब दो हजार वर्ष पुरानी आयु की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
मंच के डाॅ. पीजी नाजपांडे के अनुसार, मदन महल की पहाड़ियों पर स्थित बैलेंसिंग राॅक से महज 20 फीट की दूरी पर बहुमंजिला इमारत का निर्माण किया जा रहा है। दावा किया कि वर्ष 1910 के राजस्व रिकार्ड में खसरा नंबर 194 की करीब 30 एकड़ जमीन सरकारी दर्ज थी, लेकिन अतिक्रमण और निजी स्वामित्व बढ़ने से अब चट्टान के आसपास महज 0.8 हेक्टेयर सरकारी जमीन बची है। इन दावों की राजस्व रिकॉर्ड से जांच जरूरी है।
प्राकृतिक धरोहर के आसपास निर्माण की अनुमति को लेकर सवाल खड़े हो रहे है। मंच के अनुसार पर्यटन विभाग इसे पुरातत्व विभाग की जिम्मेदारी बता रहा हैं। नगर निगम के भवन अधिकारी ने भी आसपास हो रहे निर्माण की जानकारी नहीं होने की बात कही।
मंच के एडवोकेट वेदप्रकाश अधौलिया, डीके सिंह सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ता ने निर्माण और जमीन के रिकार्ड की जांच कर बैलेंसिंग राक तथा आसपास के क्षेत्र को संरक्षित करने की मांग की।
बैलेंसिंग राक के पास निर्माण कार्य की जानकारी नहीं हैं। निर्माण निजी भूमि पर हो सकता है। फिर भी मामला संज्ञान में आया है इसकी जांच कराई जाएगी।
शैलेंद्र सिंह कौरव, भवन अधिकारी, नगर निगम
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