
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया के हालिया बयान को लेकर सियासत तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के नेता अश्वनी पराजपे ने इसे कांग्रेस की “बीमार, विकृत और आपराधिक सोच” का प्रतीक बताते हुए तीखा हमला बोला है।
उन्होंने कहा कि यह बयान किसी क्षणिक भूल का परिणाम नहीं, बल्कि महिलाओं और एससी-एसटी समाज के प्रति कांग्रेस नेताओं की मानसिकता को उजागर करता है।
अश्वनी पराजपे ने कहा कि महिला कोई वस्तु या प्रदर्शन की चीज नहीं है, बल्कि वह सम्मान, स्वाभिमान और अधिकारों की प्रतीक है। कांग्रेस विधायक द्वारा दिए गए शब्द लोकतंत्र में न केवल अस्वीकार्य हैं, बल्कि दंडनीय भी हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि एससी-एसटी समाज की महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को इस प्रकार महिमामंडित करना संविधान, कानून और मानवता तीनों का अपमान है।
फूल सिंह बरैया ने एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान दावा किया कि कुछ विशेष ग्रंथों में अनुसूचित जाति (SC) की महिलाओं के साथ सहवास को 'पुण्य' का काम बताया गया है। उनके मुख्य तर्क इस प्रकार थे।
उन्होंने 'रुद्रयामल तंत्र' नामक पुस्तक का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें लिखा है कि SC समाज की महिलाओं के साथ संबंध बनाने से 'काशी तीर्थ' के बराबर पुण्य मिलता है। उन्होंने कहा कि इसी सोच के कारण अपराधी यह मानकर रेप करते हैं कि उन्हें तीर्थ का फल मिलेगा।
बरैया ने यह भी कहा कि ST, SC और OBC समाज में कोई 'खूबसूरत' लड़की नहीं होती, जिससे दिमाग विचलित हो और अपराध हो। उन्होंने छोटी बच्चियों के साथ होने वाले अपराधों को भी इसी कथित 'धार्मिक फल' की मानसिकता से जोड़ा।
जनवरी 2026 - दलित एजेंडा कार्यक्रम में SC-ST विधायकों की स्थिति की तुलना 'कुत्तों' से की और आदिवासियों को हिंदू न बनने की सलाह दी।
अक्टूबर 2024 - प्रशासनिक अधिकारियों को धमकी देते हुए हाथ तोड़ने और आँख फोड़ने की बात कही।
अक्टूबर 2020 - सवर्ण समाज पर निशाना साधा और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की शहादत पर विवादास्पद टिप्पणी की।
विधायक के इन बयानों के बाद भाजपा हमलावर है, वहीं कांग्रेस के भीतर भी असहजता देखी जा रही है।
'रेप करने वाला सिर्फ एक अपराधी होता है। उसे किसी भी जाति या धर्म से नहीं जोड़ा जा सकता और न ही किसी भी तर्क से बलात्कार जैसे अपराध को सही ठहराया जा सकता है।' - जीतू पटवारी, प्रदेश अध्यक्ष, मध्य प्रदेश कांग्रेस
जबलपुर में भाजपा नेताओं ने इसे कांग्रेस की 'विकृत और बीमार सोच' करार दिया है। नेता अश्वनी पराजपे ने कहा कि महिलाओं को वस्तु समझना और अपराधों को धर्मग्रंथों की आड़ में पेश करना संविधान और मानवता का अपमान है।