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जबलपुर में क्यूआर कोड पर डाला काला कपड़ा, व्यापारियों ने नहीं लिया यूपीआई भुगतान

छोटे व्यापारियों और कुछ श्रेणियों को इससे छूट दी गई है। यूपीआई के व्यक्ति-से-व्यक्ति भुगतान इस व्यवस्था के दायरे में नहीं हैं। यदि शुल्क से व्यापारियो...और पढ़ें

By Pankaj TiwariEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Wed, 23 Sep 2026 04:30:22 PM (IST)Updated Date: Wed, 23 Sep 2026 04:30:22 PM (IST)
जबलपुर में क्यूआर कोड पर डाला काला कपड़ा, व्यापारियों ने नहीं लिया यूपीआई भुगतान
'नो यूपीआई डे' मनाते शहर के कई व्यापारिक संगठन। नईदुनिया

HighLights

  1. 2000 से अधिक के लेनदेन पर एमडीआर है प्रस्तावित
  2. शहरभर के व्यापारियों ने किया एक दिन का प्रदर्शन
  3. कम मार्जिन वाले कारोबार पर इसीधा असर पड़ेगा

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के विरोध में बुधवार को शहर के कई व्यापारिक संगठनों ने 'नो यूपीआई डे' मनाया। व्यापारियों ने दुकानों पर लगे यूपीआई क्यूआर कोड और पेमेंट डिवाइस को ढककर सांकेतिक विरोध जताया।

अतिरिक्त शुल्क से कारोबार की लागत बढ़ेगी

कई व्यापारियों ने 2000 से अधिक के भुगतान यूपीआई से लेने से भी इनकार किया। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि अतिरिक्त शुल्क से कारोबार की लागत बढ़ेगी और कम मार्जिन वाले कारोबार पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

दूसरे भुगतान माध्यमों से रुपये देने के लिए कहा

जबलपुर थोक वस्त्र व्यापारी संगठन के अध्यक्ष नवनीत जैन ने बताया कि संगठन से जुड़े करीब 140 व्यापारियों ने नो यूपीआई डे में सहभागिता की। थोक बाजार में रोजाना करीब 90 लाख से एक करोड़ रुपये का कारोबार ऑनलाइन भुगतान के माध्यम से होता है, लेकिन बुधवार को व्यापारियों ने यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं किया। क्यूआर कोड पर कवर लगाकर ग्राहकों को दूसरे भुगतान माध्यमों का उपयोग करने के लिए कहा गया।


दवा से लेकर थोक बाजार तक विरोध

दीनदयाल दवा व्यापारी संगठन के चंद्रेश जैन ने बताया कि उनके संगठन ने भी नो यूपीआई डे में सहभागिता की। मुकादमगंज व्यापारी संगठन, बैगिंग एसोसिएशन सहित अन्य व्यापारिक संगठनों में भी प्रस्तावित शुल्क को लेकरविरोध की स्थिति बनी हुई है।

मुकादमगंज व्यापारी संघ के भीम गुप्ता ने कहा कि यूपीआई से भुगतान व्यापारियों और ग्राहकों दोनों के लिए सुविधाजनक रहा है। अब शुल्क लगाए जाने से व्यापारियों के मुनाफे पर असर पड़ेगा। इसी वजह से विरोध किया जा रहा है।

चैंबर जुटा रहा जानकारी

महाकोशल चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के मानसेवी मंत्री अखिल मिश्रा ने बताया कि संगठन प्रस्तावित यूपीआई शुल्क से जुड़े तथ्यों और इसके व्यापार पर संभावित प्रभाव की जानकारी जुटा रहा है। इसके आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा। यदि शुल्क से व्यापारियों के हित प्रभावित होते हैं तो संगठन विरोध करेगा।

16 से अधिक संगठनों का समर्थन

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से सिविक सेंटर में प्रदर्शन किया गया। मंच के डॉ. पी. जी. नाजपांडे ने दावा किया कि 16 से अधिक संगठन यूपीआई शुल्क व्यवस्था के विरोध में हैं। इससे पहले मंच सहित विभिन्न जनसंगठनों ने 23 सितंबर को नो यूपीआई डे मनाने की घोषणा की थी।

क्या है प्रस्तावित व्यवस्था

मौजूदा जानकारी के अनुसार 15 अक्टूबर से 2000 से अधिक के पात्र पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत तक एमडीआर प्रस्तावित है।

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