
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद जबलपुर नगर निगम सर्तक तो गया है, लेकिन पेयजल आपूर्ति लाइनों के दुरुस्तीकरण कार्य में अब भी हीलाहवाली की जा रही है। हाल ये है कि नाला-नालियों से गुजर रही पानी की पाइपलाइन को बदलना तो दूर जो जलापूर्ति लाइन वर्षों से फूटी हैं उनकी मरम्मत भी नहीं कराई जा रही है।
कजरवारा स्थित धोबीघाट के पास मुख्य पाइपपलाइन का भी यही हाल है। ये पाइपलाइन पिछले दिनों से फूटी है। आस-पास के स्थानीय नागरिक न सिर्फ फूटी लाइन के पास ही स्नान करते हैं बल्कि कपड़े भी यहीं धोते हैं। इस तरह फूटी पाइपलाइन से छेड़छाड़ की आंशका और किसी बड़ी अनहोनी का खतरा बना हुआ है।
भोंगाद्वार वाटर फिल्टर प्लांट के माध्यम से इस मुख्य पाइपलाइन के जरिये कजरवारा, धोबीघाट सहित आस-पास के क्षेत्र में जलापूर्ति की जाती है। जिस तरह मुख्य लाइन से छेड़छाड़ कर पानी उपयोग में लिया जा रहा है उससे पानी की शुद्धता पर भी सवाल खड़े गए हैं। वहीं जलापूर्ति लाइनों के दुरुस्तीकरण के कार्य में की जा रही लापरवाही भी उजागर कर रहे हैं।
धोबीघाट में मुख्य जलापूर्ति लाइन से छेड़छाड़ के हाल चौंकाने वाले हैं। क्योंकि यहां स्थानीय लोग पाइपलाइन के नीचे स्नान कर रहे हैं, कपड़ों की धुलाई कर रही और गीले कपड़े पाइपलाइन और एयरवाल्व पर टांग भी रहे हैं। जिससे कपड़े का गंदा पानी वाल्व या पानी के लीकेज के साथ घुलने का भी अंदेशा है। इस स्थान पर अव्यवस्था की जानकारी होने के बाद भी जिम्मेदार बेसुध हैं।
नगर निगम पाइपलाइन के रखरखाव पर सालाना करीब 12 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। जिसमें पाइपलाइनों की मरम्मत, बदलाव सहित अन्य कार्य शामिल है। परंतु पाइपलाइनों की दुर्दशा में सुधार नही हो रहा है। सवाल ये भी उठ रहा है नगर निगम इतनी मोटी रकम खर्च कहां कर रहा है? धोबीघाट के अलावा गोरखपुर एमजीम स्कूल के सामने व अन्य क्षेत्रों इस तरह फूटी पाइपलाइन और उसका उपयोग करती तस्वीरें नजर आ जाएंगी।