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कमल नाथ सरकार में मंत्री के रिश्तेदार को फायदा पहुंचाने बदला नहर का नक्शा, एमपी हाईकोर्ट में 4 नवंबर को होगी सुनवाई

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट अब परियोजना के मूल नक्शे, बदलाव, बढ़ी लागत और किसानों की जमीन पर प्रभाव से जुड़े तथ्यों पर अंतिम सुनवाई करेगी।

By Surendra DubeyEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Thu, 08 Oct 2026 08:26:50 AM (IST)Updated Date: Thu, 08 Oct 2026 08:41:53 AM (IST)
कमल नाथ सरकार में मंत्री के रिश्तेदार को फायदा पहुंचाने बदला नहर का नक्शा, एमपी हाईकोर्ट में 4 नवंबर को होगी सुनवाई
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर। - फाइल फोटो

HighLights

  1. मामला सिवनी जिले की पाटन-कनेरा लघु सिंचाई परियोजना से जुड़ा है
  2. लागत पहले 9.30 करोड़ रुपये स्वीकृत हुई थी, नक्शा बदलने पर यह 20 करोड़ हो गई
  3. इससे किसानों की उपजाऊ जमीन प्रभावित हो रही है

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक याचिका की सुनवाई में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि तत्कालीन कमल नाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में सिंचाई मंत्री के रिश्तेदार को लाभ पहुंचाने के लिए नहर का नक्शा बदल दिया गया। इससे परियोजना की स्वीकृत लागत में वृद्धि हो गई। इस मामले में कोर्ट में चार नवंबर को अंतिम सुनवाई होगी।

मामला सिवनी जिले की पाटन-कनेरा लघु सिंचाई परियोजना से जुड़ा है, जिसकी लागत पहले 9.30 करोड़ रुपये स्वीकृत हुई थी, लेकिन नक्शा बदलने से लागत करीब 20 करोड़ रुपये हो गई। इस बाबत याचिका वर्ष 2019 में दायर हुई थी। जिस पर 19 नवंबर 2024 को न्यायमूर्ति विनय सराफ की एकलपीठ ने इसे व्यापक जनहित से जुड़ा मामला मानते हुए कोर्ट के समक्ष पूर्ण विवरण रखने का निर्देश दिया था।


परियोजना का मूल नक्शा बदला

अब कोर्ट परियोजना के मूल नक्शे, बदलाव, बढ़ी लागत और किसानों की जमीन पर प्रभाव से जुड़े तथ्यों पर अंतिम सुनवाई करेगी। मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ के समक्ष लंबित मामले में पाटन निवासी किसान ऋषि पाराशर ने आरोप लगाया है कि तत्कालीन कमल नाथ सरकार में सिंचाई मंत्री रहे हुकुम सिंह कराड़ा के रिश्तेदार गणपत सिंह गुर्जर को लाभ पहुंचाने के लिए परियोजना का मूल नक्शा बदल दिया गया।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि तत्कालीन सिंचाई मंत्री के सचिव के पत्र के बाद मुख्य अभियंता स्तर पर परियोजना में बदलाव कराया गया। बदले हुए प्रोजेक्ट से अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के किसानों की उपजाऊ जमीन प्रभावित हो रही है।

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