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मेसर्स आनंद माइनिंग कॉरपोरेशन का मामला : हाई कोर्ट ने कहा कि चार माह में फैसला करें

कंपनी ने यह भी कहा कि जांच में इस्तेमाल मूल दस्तावेज, गणना का तरीका और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई। उसने अपनी खदानों के लिए वैध पट्टे और जर...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Wed, 16 Sep 2026 07:59:06 PM (IST)Updated Date: Wed, 16 Sep 2026 07:59:06 PM (IST)
मेसर्स आनंद माइनिंग कॉरपोरेशन का मामला : हाई कोर्ट ने कहा कि चार माह में फैसला करें
कोर्ट ने कहा कि कंपनी को लगभग छह माह में आठ से नौ अवसर मिल चुके हैं।

HighLights

  1. लौह अयस्क खदानों में अधिक खनन के आरोप
  2. 234 करोड़ की वसूली की कार्रवाई को चुनौती निरस्त
  3. कलेक्टर के सामने चल रही सुनवाई में अपना पक्ष रखें

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर । हाई कोर्ट से सिहोरा तहसील के टिकरिया और प्रतापपुर स्थित लौह अयस्क खदानों में वर्ष 2004 से 2017 के बीच कथित अधिक खनन के मामले में मेसर्स आनंद माइनिंग कॉरपोरेशन को राहत नहीं मिली है।

युगलपीठ ने कंपनी की याचिका निरस्त की

न्यायमूर्ति आनंद पाठक व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने कंपनी की याचिका निरस्त कर दी है। इसके साथ ही कलेक्टर, जबलपुर को मामले की सुनवाई पूरी कर प्रमाणित आदेश की प्रति मिलने के चार माह के भीतर प्रकरण का निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।

कंपनी की ओर से इनने रखा पक्ष

कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ और वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल के साथ अधिवक्ता शमिला इरम फातिमा और अंकिता सिंह परिहार ने पक्ष रखा। राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत रूपराह और शासकीय अधिवक्ता पीयूष जैन तथा हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंकित सक्सेना और पंकज कुमार दुबे उपस्थित हुए।


दो खदानों पर इतनी वसूली का प्रस्ताव

टिकरिया खदान 20.002 हेक्टेयर और प्रतापपुर खदान 11.578 हेक्टेयर क्षेत्र में है। राज्य सरकार ने कथित अधिक खनन की जांच के लिए 23 अप्रैल 2025 को जांच समिति बनाई थी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर ने 10 नवंबर 2025 को दोनों खदानों के लिए नोटिस जारी किए। टिकरिया के मामले में 113 करोड़ 81 लाख 94 हजार 280 रुपये और प्रतापपुर में 120 करोड़ 69 लाख 41 हजार 910 रुपये की वसूली प्रस्तावित की गई।

कंपनी ने कार्रवाई पर उठाए सवाल

कंपनी ने हाई कोर्ट में कहा कि जांच समिति का गठन किसी वैधानिक प्रवि‍धान या वैध अधिकार के तहत नहीं किया गया था। इसलिए उसकी रिपोर्ट के आधार पर खनिज की कीमत, राॅयल्टी या कर की वसूली की कार्रवाई नहीं की जा सकती।

सरकार बोली- अभी अंतिम फैसला नहीं

सरकार ने कहा कि कलेक्टर के सामने मामला अभी लंबित है और कंपनी को अपना जवाब देने के लिए आठ मौके तथा दूसरे जुड़े मामले में नौ मौके दिए गए। इसके बावजूद कंपनी ने अपना पूरा अंतिम जवाब नहीं दिया। जांच रिपोर्ट अंतिम वसूली आदेश नहीं है। रिपोर्ट में कुल 443 करोड़ 4 लाख 86 हजार 890 रुपये और उस पर जीएसटी जमा कराने की बात कही गई थी, लेकिन अंतिम देनदारी तय करना कलेक्टर का काम है।

हाई कोर्ट ने क्या कहा

युगलपीठ ने कहा कि कलेक्टर के सामने अभी शो-काज नोटिस की कार्रवाई चल रही है। अधिक खनन, राशि की गणना और कानून से जुड़े सवालों पर पहले सक्षम अधिकारी को निर्णय करना है। जांच रिपोर्ट कलेक्टर के लिए बाध्यकारी नहीं है। कलेक्टर कंपनी की आपत्तियां, जांच रिपोर्ट और संबंधित रिकार्ड देखकर कानून के अनुसार स्वतंत्र फैसला करेंगे। अंतिम आदेश से असंतुष्ट होने पर कंपनी को उपलब्ध वैधानिक अपील का अधिकार रहेगा।

लगभग छह माह में आठ से नौ अवसर मिल चुके हैं

कोर्ट ने यह भी कहा कि कंपनी को लगभग छह माह में आठ से नौ अवसर मिल चुके हैं। इसलिए कलेक्टर अब मामले का जल्द निराकरण करें। हाई कोर्ट ने साफ किया कि उसने कंपनी की वास्तविक देनदारी पर कोई राय नहीं दी है और कलेक्टर अपने निर्णय में हाई कोर्ट की टिप्पणियों से प्रभावित नहीं होंगे।

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