
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। वेटरनरी विश्वविद्यालय में शोध अब बाहरी एजेंसियों की मंजूरी और फंडिंग के इंतजार में नहीं अटकेगा। विश्वविद्यालय अपने प्रोफेसरों के शोध को खुद वित्तीय ताकत देगा और जरूरी संसाधन भी उपलब्ध कराएगा।
चयनित प्रोफेसर एक वर्ष तक अपने विषय पर काम करेंगे। खास बात यह है कि इन शोधों में पशुओं की नस्ल सुधार, बेहतर आहार, पशु रोग नियंत्रण, दुग्ध उत्पादन और पशुपालन से किसानों की आय बढ़ाने जैसे सीधे उपयोग वाले विषयों को प्राथमिकता दी गई है। विश्वविद्यालय की योजना है कि शोध का नतीजा कागज पर नहीं, बल्कि पशुपालकों के बीच दिखाई दे।
योजना के अंतर्गत ‘एक प्रोफेसर-एक शोध’ के तहत प्रत्येक चयनित प्रोफेसर को अपने विशेषज्ञता वाले क्षेत्र में एक शोध पर काम करने का अवसर मिलेगा। विश्वविद्यालय शोध पूरा करने के लिए आर्थिक सहायता के साथ आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध कराएगा।
शोध विषयों में पशु चिकित्सा, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, पशु रोग नियंत्रण और किसानों की आय बढ़ाने से जुड़े क्षेत्रों पर विशेष जोर है। प्रशासन का मानना है कि प्रयोगशाला में विकसित तकनीक और शोध निष्कर्ष तभी सार्थक होंगे, जब उनका लाभ वास्तविक रूप से पशुपालकों और किसानों तक पहुंचे।
विश्वविद्यालय के डायरेक्टर रिसर्च प्रो. राजेश शर्मा के मुताबिक चयनित प्रोफेसरों को निर्धारित अवधि में शोध पूरा करना होगा। केवल शोध पत्र या अकादमिक परिणाम ही नहीं, बल्कि उसकी व्यावहारिक उपयोगिता और प्रभाव भी परखा जाएगा।
आकलन होगा कि विश्वविद्यालय की वित्तीय सहायता से शोध का कितना परिणाम निकला और उसका लाभ किस स्तर तक पहुंचा। इसी आधार पर योजना का विस्तार और नए शोध विषय तय किए जाएंगे। विश्वविद्यालय में 100 से अधिक शिक्षक हैं। प्रशासन अब प्रत्येक शिक्षक की विशेषज्ञता को अनुसंधान से जोड़कर विश्वविद्यालय को शोध के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
योजना के पहले चरण में करीब पांच शोध चयनित किए गए थे और अधिकांश पर काम शुरू हो चुका है। इनमें देशी गाय की नस्लों को बढ़ावा देने तथा मुर्गी की देशी प्रजाति में विदेशी नस्ल के समतुल्य गुण विकसित करने जैसे विषय शामिल हैं। दूसरे चरण में चयनित शोधों में भी प्रदेश की वर्तमान जरूरतों और भविष्य की चुनौतियों को केंद्र में रखा गया है।
पहले चरण में करीब पांच शोधों को चयनित कर वित्तीय मदद दी गई। दूसरे चरण में करीब सात शोध चुने गए हैं। सभी शोध विश्वविद्यालय, कालेज, प्रदेश की जरूरत और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।
प्रो. मनदीप शर्मा, कुलगुरु, वेटरनरी विश्वविद्यालय
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