
नईदुनिया प्रतिनिधि जबलपुर। विजयनगर स्थित शैल्वी हस्पिटल में मरीज और स्वजन सहित स्टाफ में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब अस्पताल की बिल्डिंग के तीसरी मंजिल में आग लग गई। आग की लपटें और धुआं का गुबार उठने से अस्पताल में हड़कंप मच गया। आग लगने का कारण सामने आया है।
मरीजों के स्वजनों ने फायर अलार्म सिस्टम न बजने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि आग लगने के बाद भी फायर अलार्म ने काम नहीं किया और आग लगने से उनका कीमती सामान भी जल गया। अपने मरीजों को गोद में उठाकर शिफ्ट करना पड़ा। इसे लेकर अस्पताल प्रबंधन और मरीजों के स्वजनों के बीच तकरार व हंगामा भी हुआ।
गुस्साए परिजनों ने अस्पताल के अंदर वाले गेट पर कार खड़ी कर दी। प्रबंधन की समझाइश के बाद कार को गेट से हटा लिया गया, लेकिन घटना को लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप सामने आए। स्वजनों का आरोप है कि आग के दौरान उनके सामान को नुकसान पहुंचा और प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय मरीजों पर ही आग लगाने का आरोप लगा रहा था।
आनन-फानन में नगर निगम के दमकल शाखा को सूचना दी गई और अस्पताल प्रबंधन के साथ नगर निगम के दमकल कर्मियों ने तीसरी मंजिल पर भर्ती करीब छह मरीज और उनके स्वजनों को सुरक्षित नीचे की मंजिलों पर शिफ्ट कर दिया। आग से कुछ बेड व अन्य सामान जल गया। गनीमत रही कि समय रहते आग पर काबू पा लिया गया वरना बड़ा हादसा भी हो सकता था।
अस्पताल में आग लगने की सूचना मिलते ही तुरंत टीम को रवाना कर दिया गया था। अस्पताल के फायर सिस्टम से ही आग काे काबू करने में मदद मिली। इसलिए आग को फैलने से पहले ही कंट्रोल कर लिया गया।
कुशाग्र ठाकुर, अग्नि शमन अधिकारी, नगर निगम
तीसरे तल पर प्राइवेट रूम नंबर 315 में शाॅर्ट सर्किट हुआ था। मरीज के परिजन कोई इलेक्ट्राॅनिक डिवाइस चार्ज कर रहे थे, इस दौरान चिंगारी निकली। धुआं भरने की सूचना मिलते ही अस्पताल का स्टाफ एक्टिव हुआ और दूसरे प्राइवेट रूम के मरीजों को भी अन्यत्र शिफ्ट किया। अस्पताल में मौजूद फायर उपकरणों से आग पर काबू पा लिया गया। मौके पर ननि का फायर बिग्रेड अमला भी पहुंचा।
अंकित जैन, डिप्टी सीईओ, शैल्वी हाॅस्पिटल
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