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MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, रेप केस में उम्रकैद की सजा काट रहे युवक को किया बरी, रेडियोलॉजिस्ट रिपोर्ट पर लगी मुहर

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में आरोपी की उम्रकैद की सजा रद्द कर बरी कर दिया है। कोर्ट ने माना कि रेडियोलॉजिस्ट की रिपोर्ट के अनुसार घटना...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Fri, 31 Jul 2026 08:55:32 AM (IST)Updated Date: Fri, 31 Jul 2026 08:58:02 AM (IST)
MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, रेप केस में उम्रकैद की सजा काट रहे युवक को किया बरी, रेडियोलॉजिस्ट रिपोर्ट पर लगी मुहर
नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने आरोपी को बेल दे दी। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. MP हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को बरी कर दिया
  2. कोर्ट ने कहा कि रेप के समय पीड़िता की उम्र 18 साल से ज्यादा की थी
  3. कोर्ट ने इसमें सेशन कोर्ट के फैसले को पलट दिया है, जिसमें उसे उम्रकैद मिली

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक मामले में निचली अदालत (सेशन कोर्ट) के फैसले को पलट दिया है। कोर्ट ने नाबालिक सेदुष्कर्म के आरोपी शख्स को बरी कर दिया है। अदालत ने रेडियोलॉजिस्ट की उस मेडिकल रिपोर्ट पर भरोसा जताया, जिसके मुताबिक पीड़िता घटना के समय बालिग (18 वर्ष से अधिक) थी।

जस्टिस वी.के. अग्रवाल और जस्टिस ए.के. सिंह की बेंच ने यह फैसला सुनाया। आरोपी को उम्रकैद की सजा बालाघाट जिले की वारासिवनी कोर्ट ने सुनाई थी।

स्कूल रिकॉर्ड पर भारी पड़ी रेडियोलॉजिस्ट की रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा- पीड़िता की उम्र के निर्धारण के मामले में रेडियोलॉजिस्ट की मेडिकल राय, स्कूल के दाखिला रजिस्टर (जिसमें जन्मतिथि 19 दिसंबर 2003 दर्ज थी) की तुलना में अधिक भरोसेमंद लगती है। घटना 30 जुलाई 2021 की बताई गई थी, जिसके बाद 2 अगस्त 2021 को एक महिला डॉक्टर ने पीड़िता की जांच की।


उम्र के सही आकलन के लिए रेडियोलॉजिस्ट की भी राय ली गई थी। रेडियोलॉजिस्ट की जांच में सामने आया कि पीड़िता की उम्र 18 साल से अधिक थी। सुनवाई के दौरान दूसरे पक्ष (Prosecution) ने इस एक्स-रे रिपोर्ट को ट्रायल कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश नहीं किया था। हालांकि यह केस फाइल का हिस्सा थी।

कोर्ट ने आगे कहा- वारासिवनी ट्रायल कोर्ट ने बिना कोई कारण बताए इस रिपोर्ट और डॉक्टर की राय को नजरअंदाज करने की भूल की। इसके अलावा, पीड़िता के स्कूल के प्रिंसिपल भी कोर्ट में यह बताने में असमर्थ रहे कि स्कूल रजिस्टर में किस आधार पर लड़की की जन्मतिथि दर्ज की गई थी।

आरोपी के वकील का पक्ष

सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने दलील दी कि दोनों के बीच संबंध आपसी सहमति से बने थे। उन्होंने कोर्ट के सामने मैरिज सर्टिफिकेट (शादी का प्रमाण पत्र) पेश करते हुए स्कूल रिकॉर्ड में दर्ज जन्मतिथि को चुनौती दी।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा- अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा कि घटना वाले दिन (30 जुलाई 2021) पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम थी। अभियोजन यह भी साबित नहीं कर पाया कि पीड़िता को डरा-धमकाकर या जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाने पर मजबूर किया गया था, जिससे यह मामला दुष्कर्म (Rape) की श्रेणी में आए।

क्या था पूरा मामला?

पीड़िता के परिवार के मुताबिक, कक्षा 12वीं की छात्रा 21 जुलाई 2021 को अचानक गायब हो गई थी। पिता की शिकायत पर पुलिस ने जांच शुरू की। 31 जुलाई 2021 को लड़की को बेंगलुरु से बरामद किया। लड़की ने पुलिस को दिए बयान में बताया था- मां की डांट से नाराज होकर वह 19 जुलाई 2021 को घर छोड़कर अकेली निकल गई थी। रास्ते में उसे आरोपी मिला, जिसने शुरुआत में उसे घर वापस जाने की सलाह दी। जब उसने इनकार कर दिया, तो वह उसे अपने दोस्त के घर ले गया। इसके बाद दोनों नागपुर और हैदराबाद होते हुए 24 जुलाई को बेंगलुरु पहुंचे, जहां 30 जुलाई को आरोपी ने उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए।

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