
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने जा रही महाराष्ट्र की छात्राओं को मध्य प्रदेश के इटारसी रेलवे स्टेशन पर हिरासत में लिए जाने का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है। इस संबंध में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएं दायर की गई हैं।
नौ अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने विशाखा प्रशांत लोंढे विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन सहित अन्य के मामले में राज्य शासन को संबंधित व्यक्ति को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
न्यायालय ने यह भी कहा कि शासन संबंधित व्यक्ति की सुरक्षित वापसी उसके परिवार तक सुनिश्चित करने की व्यवस्था कर सकता है। मामले में नोटिस जारी कर अगली सुनवाई 13 अक्टूबर, 2026 के लिए निर्धारित की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश उपाध्याय ने अधिवक्ता शुभम मिश्रा और हेमंत गुप्ता के साथ पक्ष रखा। राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता बीडी सिंह और शासकीय अधिवक्ता आरडी परहा उपस्थित हुए।
दरअसल, दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए महाराष्ट्र के पुणे से गोवा एक्सप्रेस में सवार छात्र-छात्राओं को इटारसी स्टेशन पर उतारकर हिरासत में लिया गया। प्रदर्शन काकरोच जनता पार्टी की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में आयोजित किया गया था।
पुलिस अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में इटारसी में 21 लोगों को हिरासत में लिए जाने का उल्लेख है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध ट्रेन से उतारकर रोका गया। हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार, राज्य शासन को संबंधित व्यक्ति को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना है।
शासन चाहे तो अगली सुनवाई की तारीख से पहले भी दूसरे पक्ष को पूर्व सूचना देकर संबंधित व्यक्ति को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है। आदेश में परिवार तक सुरक्षित वापसी की व्यवस्था का विकल्प भी दिया गया है। अब मामले में 13 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।