केन-बेतवा परियोजना से पन्ना टाइगर रिजर्व के आधे से ज्यादा हिस्से के डूबने का दावा, MP हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगी सीईसी रिपोर्ट
केन-बेतवा लिंक परियोजना के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को लेकर दायर जनहित याचिका पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से सेंट्रल एम्पावर्ड कमेट...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 09 Oct 2026 08:14:06 PM (IST)Updated Date: Fri, 09 Oct 2026 08:15:55 PM (IST)
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट में लंबित कार्यवाही की स्थिति भी स्पष्ट करने को कहा
- याचिका में केन घड़ियाल अभयारण्य पर संभावित असर का मुद्दा उठा
- परियोजना के विरोध में आदिवासियों के आंदोलन का भी उल्लेख
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को लेकर दायर जनहित याचिका पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
याचिका में दावा किया गया है कि परियोजना के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व का आधे से अधिक हिस्सा डूब क्षेत्र में आ सकता है और करीब 60 लाख पेड़ों की कटाई हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित कार्यवाही की स्थिति भी स्पष्ट करने को कहा
मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने केंद्र से सीईसी रिपोर्ट में सामने आई कथित अनियमितताओं और परियोजना से संबंधित सुप्रीम कोर्ट में लंबित कार्यवाही की स्थिति भी स्पष्ट करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।
केन घड़ियाल अभयारण्य पर संभावित असर का मुद्दा उठाया
जबलपुर के अधिवक्ता अरिहंत तिवारी की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि परियोजना से पन्ना टाइगर रिजर्व के वन क्षेत्र, बाघों सहित अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और उनके विचरण गलियारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। केन घड़ियाल अभयारण्य पर संभावित असर का मुद्दा उठाते हुए स्वतंत्र और वैज्ञानिक आकलन की जरूरत भी बताई गई है।
2017 की पर्यावरण रिपोर्ट पर सवाल
याचिका में वर्ष 2017 की पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए तथ्यात्मक त्रुटियों और स्वतंत्र जलवैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत का उल्लेख किया गया है। वन कटाई से बुंदेलखंड के पर्यावरण और स्थानीय जलवायु पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है।
आदिवासियों के आंदोलन का भी उल्लेख
याचिका में छतरपुर जिले में परियोजना के विरोध में आदिवासियों और किसानों के आंदोलन व प्रदर्शनकारियों पर प्रशासनिक दबाव डालने के आरोप लगाए गए हैं। राशन-पानी की आपूर्ति और ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित किए जाने संबंधी दावे भी किए गए हैं।
पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों के व्यापक मूल्यांकन की मांग
इन आरोपों पर अदालत का अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है। केन-बेतवा परियोजना का उद्देश्य केन नदी के जल को बेतवा नदी बेसिन तक पहुंचाकर बुंदेलखंड के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल सुविधा बढ़ाना है।
याचिका में परियोजना के लाभों के साथ उसके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों के व्यापक मूल्यांकन की मांग की गई है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अरिहंत तिवारी ने स्वयं पक्ष रखा। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सालिसिटर जनरल सुनील जैन और राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता विवेक शर्मा उपस्थित हुए।