
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने हैदराबाद से जबलपुर लाए गए रेस के घोड़ों की मौत और उनके रखरखाव से जुड़े मामले में फार्म हाउस की जांच के आदेश दिए हैं।
गुरुवार को सुनवाई के दौरान केयरटेकर की ओर से बताया गया कि जीवित बचे सभी घोड़े बेच दिए गए हैं। इस पर याचिकाकर्ता ने आपत्ति जताते हुए कहा कि केयरटेकर को घोड़े बेचने का अधिकार नहीं है।
याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी सिमरन इस्सर की ओर से आवेदन प्रस्तुत कर पशु चिकित्सकों की टीम के साथ फार्म हाउस का निरीक्षण कराने की मांग की गई।
कोर्ट ने आवेदन स्वीकार करते हुए जिला पशु अधिकारी और पनागर थाना प्रभारी की उपस्थिति में फार्म हाउस की जांच की अनुमति दे दी।
याचिका में आरोप है कि हैदराबाद निवासी सुरेश पाल के पास 150 से अधिक रेस के घोड़े थे। कर्मचारियों को वेतन और घोड़ों को भोजन नहीं मिलने से वहां करीब 90 घोड़ों की मौत हो गई।
इसके बाद 29 अप्रैल से 3 मई 2025 के बीच 57 घोड़ों को बिना प्रशासन और पशु विभाग को सूचना दिए जबलपुर के पनागर स्थित रैपुरा फार्म हाउस लाया गया, जहां उचित देखभाल के अभाव में लगातार मौतें होने का आरोप है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रायन डिसल्वा व अधिवक्ता सुरेश अवस्थी ने पैरवी की। केयरटेकर सचिन तिवारी ने पूर्व में हलफनामे में बताया था कि 57 में से 19 घोड़ों की मौत हो चुकी है।
22 घोड़े बेचे जा चुके हैं और तीन नए घोड़े खरीदे गए हैं। उस समय 19 घोड़ों के स्वस्थ होने का दावा किया गया था, जबकि गुरुवार को कोर्ट को बताया गया कि अब सभी घोड़े बेच दिए गए हैं।
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