
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। सरकारी अस्पतालों में मनमाने ढंग से डाॅक्टरों के अटैचमेंट और पदस्थापना पर अब स्वास्थ्य विभाग ने सख्ती कर दी है।
संचालनालय, भोपाल के नए आदेश के अनुसार अब जिला स्तर पर सीएमएचओ या सिविल सर्जन अपने स्तर पर किसी डाॅक्टर का अटैचमेंट या ट्रांसफर नहीं कर सकेंगे। इसके लिए भोपाल से अनुमति अनिवार्य कर दी गई है।
अब तक जिला अधिकारी जरूरत बताकर डाॅक्टरों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में अटैच कर देते थे। कई डाॅक्टर सालों से अपनी मूल पदस्थापना से अलग, शहर के बड़े अस्पतालों में सेवाएं दे रहे हैं।
संचालनालय ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए कहा है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पताल खाली हो रहे हैं। नए आदेश में स्पष्ट है कि अटैचमेंट पूरी तरह समाप्त माना जाए, और यदि कहीं अति-आवश्यक है तो प्रस्ताव संचालक को भेजा जाए।
जिले में कुल स्वीकृत डाॅक्टरों के 214 पद हैं, जिनमें से 168 पदस्थ हैं और 46 खाली हैं, लेकिन पदस्थापना का गणित गड़बड़ है।
जिला अस्पताल : यहां 32 डाॅक्टरों के स्वीकृत पद के विरुद्ध 41 डाक्टर सेवाएं दे रहे हैं। इनमें 6 डाॅक्टर पीएचसी और सिविल अस्पतालों से अटैचमेंट पर हैं। इनमें मेडिसिन के 2, सर्जरी का 1 और महिला रोग विशेषज्ञ शामिल हैं।
रानी दुर्गावती अस्पताल : यहां 18 पद स्वीकृत हैं, 22 डाॅक्टर मौजूद हैं। 4 डाक्टर शहपुरा और पनागर पीएचसी से अटैच बताए जा रहे हैं।
सिविल अस्पताल रांझी : 12 पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल 7 डाॅक्टर मौजूद हैं। रांझी में एक भी शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं है।
पीएचसी-सीएचसी स्तर : जिले की 22 पीएचसी में 44 पद स्वीकृत हैं, लेकिन 19 पद खाली हैं। बरेला, सिहोरा और मझौली की पीएचसी में दो-दो डाॅक्टर के भरोसे पूरी ओपीडी चल रही है।
विभागीय अधिकारी खुद मानते हैं कि शहर के अस्पतालों में सुविधा और प्रैक्टिस के कारण डाक्टर अटैचमेंट करवाते हैं। जिला स्तर पर मिलीभगत से फाइल चलती है और ग्रामीण अस्पतालों में ताला लग जाता है। अब संचालनालय ने सभी सीएमएचओ से अटैच डाक्टरों की सूची 7 दिन में तलब की है।
सीएमएचओ डा. नवीन कोठारी का कहना है कि आदेश प्राप्त हुआ है और सूची तैयार की जा रही है। अटैचमेंट पर आए डाक्टरों को मूल स्थान पर भेजा जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की इस सख्ती के बाद उम्मीद है कि ग्रामीण क्षेत्रों में डाक्टरों की कमी दूर होगी और शहर में जमे डाक्टरों की मनमानी पर रोक लगेगी।
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