'कलेक्टर ने स्वतंत्र रूप से मस्तिष्क का प्रयोग नहीं किया..' हाई कोर्ट से एनएसए में बंद दो भाइयों को मिली राहत
हाई कोर्ट ने एनएसए के तहत निरुद्ध दो सगे भाइयों राजेंद्र ठाकुर उर्फ छोटू और राजेश ठाकुर उर्फ भैया की नजरबंदी निरस्त कर दी।
Publish Date: Tue, 15 Sep 2026 11:52:10 AM (IST)Updated Date: Tue, 15 Sep 2026 11:54:18 AM (IST)
HighLights
- जबलपुर के जिला कलेक्टर द्वारा पारित नजरबंदी आदेश रद कर दिया
- 22 मामलों में अधिकांश वर्ष 2001 से 2015 के बीच के पुराने मामले थे
- नागरिकों के संविधान प्रदत्त अधिकारों की रक्षा आवश्यक है: हाई कोर्ट
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने एनएसए के तहत निरुद्ध दो सगे भाइयों राजेंद्र ठाकुर उर्फ छोटू और राजेश ठाकुर उर्फ भैया की नजरबंदी निरस्त कर दी। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनिंद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने दोनों याचिकाओं की एक साथ सुनवाई करते हुए छह जनवरी 2026 को जबलपुर के जिला कलेक्टर द्वारा पारित नजरबंदी आदेश रद कर दिया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता निखिल तिवारी ने पैरवी की। कोर्ट ने पाया कि नजरबंदी के आधार में बताए गए 22 मामलों में अधिकांश वर्ष 2001 से 2015 के बीच के पुराने मामले थे।
पुराने मामलों के आधार पर रासुका का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता
वर्ष 2015 के बाद केवल दो आपराधिक मामले सामने आए। कोर्ट ने कहा कि पुराने और बासी मामलों के आधार पर रासुका जैसे असाधारण कानून का यांत्रिक ढंग से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। आदेश में जिला कलेक्टर द्वारा स्वतंत्र रूप से मस्तिष्क का प्रयोग किया जाना दिखाई नहीं देता।
नागरिकों के संविधान प्रदत्त अधिकारों की रक्षा आवश्यक है
कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के अमीना बेगम बनाम तेलंगाना राज्य मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि निवारक निरोध असाधारण उपाय है। नागरिकों के संविधान प्रदत्त अधिकारों की रक्षा आवश्यक है। अप्रैल और जुलाई में बढ़ाई गई नजरबंदी की अवधि भी आदेश निरस्त होने के साथ समाप्त हो गई।
दो आईएएस अधिकारियों के खिलाफ जमानती गिरफ्तारी वारंट
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। न्यायालय के आदेश का पालन न होने पर हाई कोर्ट ने दो आइएएस अधिकारियों के खिलाफ जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने तत्कालीन प्रमुख सचिव राजस्व विवेक पोरवाल और तत्कालीन सागर कलेक्टर संदीप जीआर को 21 सितंबर को कोर्ट में पेश कराने के निर्देश दिए हैं।
वारंट की तामीली की जिम्मेदारी भोपाल पुलिस कमिश्नर और सागर एसपी को सौंपी गई है। मामला सागर कलेक्टर कार्यालय में सेक्शन आफिसर शीला सेन के नियमितीकरण से जुड़ा है।
आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर
हाई कोर्ट ने 19 मार्च 2025 को सरकार और सागर कलेक्टर को याचिकाकर्ता के दावे का 90 दिनों में निराकरण करने का आदेश दिया था। समय-सीमा बीतने के बाद भी आदेश का पालन नहीं होने पर शीला सेन ने अवमानना याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता कविता गुप्ता ने पक्ष रखा।
न अधिवक्ता नियुक्त किया गया और न अनुपालन रिपोर्ट पेश की गई
कोर्ट ने कहा कि दोनों अधिकारियों को नोटिस की तामीली के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। सागर कलेक्टर ने तीन दिसंबर 2025 को रजिस्ट्री को पत्र भेजकर तहसीलदार को संपर्क अधिकारी नियुक्त किए जाने की जानकारी दी, लेकिन न अधिवक्ता नियुक्त किया गया और न अनुपालन रिपोर्ट पेश की गई।
हाई कोर्ट ने इस स्थिति को प्रशासनिक व्यवस्था की दयनीय स्थिति बताते हुए दोनों अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी करने का निर्देश दिया।