
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त के शिकंजे में आए दमोह में पदस्थ वाणिज्यिक कर अधिकारी मनीष कुमार जैन की दो माह पहले (अगस्त) ही दमोह में पदस्थापना हुई थी।
वर्ष 2003 में नौकरी शुरू करने वाले जैन ने करीब 13 साल की सेवा में कथित तौर पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित की। जैन ने संविदा कर्मचारी के रूप में सफर शुरू किया था और फिर वाणिज्यिक कर विभाग में इंसपेक्टर और वाणिज्यिक कर अधिकारी बने।
लोकायुक्त की जांच में अधिकारी के चार बैंक खाते मिले हैं। उनकी पत्नी निधि, पिता कोमलचंद और मां शशि के नाम पर अलग-अलग पांच बैंक खाते होने की जानकारी सामने आई है। लोकायुक्त संगठन ने गुरुवार को संबंधित बैंकों को पत्र लिखकर खातों से लेन-देन एवं जमा राशि की जानकारी मांगी है। उनके निवेश की भी टोल ली जा रही है।
लोकायुक्त की टीम ने मंगलवार को मनीष कुमार जैन के जबलपुर, दमोह और भोपाल स्थित ठिकानों पर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान कुल तीन करोड़ 94 लाख 65 हजार 445 रुपये की संपत्ति का पता चला। प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह संपत्ति उनकी ज्ञात आय से करीब 280 प्रतिशत अधिक बताई गई है। टीम संपत्तियों के दस्तावेजों और बैंक खातों में जमा राशि की पड़ताल कर रही है, ताकि आय और व्यय के बीच के अंतर का आकलन किया जा सके।
लोकायुक्त की तलाशी के दौरान सागर जिले के बंडा स्थित पैतृक मकान से नकदी सहित अन्य संपत्ति से जुड़े दस्तावेज मिले थे। बरामद नकदी में पांच-पांच रुपये के सिक्के भी शामिल थे। अधिकारी के परिवार में दो बच्चे हैं, दोनों स्कूल में पढ़ते है। दोनों बच्चे के साथ मनीष की पत्नी जबलपुर में रहती है।
मनीष कुमार जैन के पिता कोमलचंद जैन बंडा में कटे-फटे नोट बदलने का काम करते हैं। उनके भाई भी व्यापार से जुड़े हुए हैं। लोकायुक्त की जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई है। अधिकारी के पिता और अन्य स्वजनों के नाम पर मौजूद बैंक खातों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
यह भी पढ़ें- जबलपुर में डीजल संकट, फंसी निगम की सफाई व्यवस्था; 2-3 लीटर में दौड़ रहे कचरा वाहन